|
गैस पाइप लाइनों के लिए चर्चा को मंज़ूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेट्रोलियम मंत्रालय को मंज़ूरी दे दी है कि प्राकृतिक गैस आयात के लिए पाइप लाइनें बिछाने के लिए विभिन्न देशों के साथ चर्चा शुरु करे. यह चर्चा बर्मा, पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और बांग्लादेश के साथ होनी है. भारत में गैसों की कुल ज़रुरत का 50 प्रतिशत और पेट्रोलियम का 85 प्रतिशत आयात किया जाता है. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने बताया कि कुल तीन पाइप लाइनों के बारे में चर्चा होनी है. उन्होंने बताया कि एक पाइप लाइन ईरान से आएगी जो पाकिस्तान से गुज़रेगी. दूसरी तुर्कमेनिस्तान से आएगी जो अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से गुज़रेगी. जबकि तीसरी पाइप लाइन बर्मा से आएगी जो बांग्लादेश से गुज़रेगी. उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से ऊर्जा क्षेत्र में भारत की ताक़त बढ़ेगी. सुरक्षा चिंताओं के कारण इन परियोजनाओं पर चर्चा लंबे समय से लंबित है. ऊर्जा क्षेत्र में भारत की स्थिति सुधारना सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के न्यूनतम साझा कार्यक्रम का प्रमुख अंग है. सरकार की ओर से कहा गया है कि भारत के आर्थिक विकास की दर को बनाए रखने के लिए ज़रुरी है कि देश में समुचित दरों पर गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति को जारी रखा जाए. समाचार एजेंसियों के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक में ओएनजीसी विदेश लिमिटेड का निवेश बढ़ाने पर चर्चा होनी थी लेकिन फ़िलहाल इसे टाल दिया गया. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||