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भारत और बर्मा के बीच अहम समझौता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और बर्मा ने पेट्रोलियम के क्षेत्र में आपसी सहयोग के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के तहत दोनों देशों ने कहा है कि वे ऊर्जा के क्षेत्र में एक दूसरे की सहायता करेंगे जिसमें बाज़ार का विकास और प्रशिक्षण आदि शामिल है. मणिशंकर अय्यर ने बर्मा के थानलिन रिफ़ायनरी के विकास के लिए दो करोड़ डॉलर का त्रृण देने की भी पेशकश भी की है. भारत के गैस एवं पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर बर्मा के दौरे पर हैं और उन्होंने बर्मा के ऊर्जा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल लून थी के साथ चर्चा के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. मणिशंकर अय्यर ने बर्मा के प्रधानमंत्री लेफ़्टिनेंट जनरल सो विन से भी मुलाक़ात की. दोनों देशों के उच्चस्तरीय मंत्रिमंडल ने भी गैस एवं पेट्रोलियम क्षेत्र के विकास के लिए चर्चा की. भारत सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार बर्मा के प्रधानमंत्री ने बर्मा और भारत की भौगोलिक परिस्थितियों में समानता की चर्चा करते हुए भारत से अनुरोध किया कि वह बर्मा में तेल-गैस क्षेत्र के विकास में सहयोग दे. इसके जवाब में भारत के पेट्रोलियम मंत्री अय्यर ने कहा कि भारत भी बर्मा के पेट्रोलियम क्षेत्र में विकास में भागीदारी को लेकर उत्सुक है. दोनों देशों के बीच जिन क्षेत्रों के विकास की बात चल रही है उसमें समुद्र के भीतर और ज़मीनी क्षेत्रों दोनों में पेट्रोलियम क्षेत्र के विकास की बात है. मणिशंकर अय्यर ने ज़ोर देकर कहा कि बर्मा को विशेष आर्थिक विकास क्षेत्र के विकास के लिए चर्चा में तेज़ी लाना चाहिए. |
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