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अमरीका में तेल की क़ीमतों में उछाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी में कच्चे तेल की क़ीमतों में एक बार फिर रिकॉर्ड उछाल आई है. माना जा रहा है कि तेल भंडार में कमी के आधिकारिक आँकड़े जारी होने के कारण ऐसा हुआ है. वॉल स्ट्रीट में एक बैरल कच्चे तेल की क़ीमत 96 सेंट बढ़कर 54.60 डॉलर हो गई है. अमरीका का तेल भंडार 12 लाख बैरल घटकर पाँच करोड़ बैरल ही रह गया है. इस कारण वहाँ चिंता बढ़ गई है क्योंकि जाड़े में तेल की खपत वैसे भी बढ़ जाती है. समस्या बढ़ती माँग और आपूर्ति में आ रही समस्याओं के कारण इस साल तेल की क़ीमतों में 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है. अमरीका के तेल विशेषज्ञों का कहना है कि मैक्सिको की खाड़ी में पिछले महीने आए समुद्री तूफान के कारण भी तेल उत्पादन पर असर पड़ा और इससे भी कच्चे तेल की क़ीमतें बढ़ीं हैं. तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक के प्रमुख पुरनुमो युसगियानतोरो ने कहा है कि विश्व बाज़ार में तेल की क़ीमतों में उछाल अक्तूबर के आख़िर तक जारी रहेगा क्योंकि माँग बढ़ी है. नाइजीरिया में हड़ताल और इराक़ में सुरक्षा चिंता के कारण भी तेल की आपूर्ति पर असर पड़ा है. हालाँकि ओपेक के सदस्य देश सऊदी अरब और कुवैत ने यह वादा किया था कि वे तेल की आपूर्ति बढ़ा देंगे ताकि बाज़ार में कमी न हो. |
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