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तेल की कीमतों पर नाइजीरिया में हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़्रीका में तेल के सबसे बड़े उत्पादक देश नाइजीरिया में तेल की बढ़ती क़ीमतों के विरोध में सोमवार से चार दिन की हड़ताल हो रही है. नाइजीरिया के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन, नाइजीरियन लेबर कांग्रेस ने धमकी दी है कि अगर पिछले दिनों कीमतों में 25 प्रतिशत की हुई वृद्धि को वापस नहीं लिया जाता तो और भी हड़तालें होंगी. वहाँ पिछले साल तेल उत्पादन के लिए दी जानेवाली कुछ सब्सिडियाँ कम कर दी गई थीं जिसके कारण तेल की कीमतों में उछाल आया. नाइजीरिया में तेल की कीमतें बढ़ने का असर विश्व बाज़ार पर भी पड़ा और तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर चली गईं. पिछले डेढ़ वर्ष में नाइजीरिया में तीसरी बार तेल की कीमतों को लेकर हड़ताल हो रही है. नाइजीरिया अफ़्रीका में कच्चे तेल का सबसे बड़ा उत्पादक देश है मगर देश की दो-तिहाई आबादी बेहद ग़रीब है. धमकी देश के 29 संगठनों के समूह के मज़दूर नेता एडम्स ओशियोम्होल ने बीबीसी से कहा है कि वे चाहते हैं कि इस मामले को सरकार के साथ बातचीत कर सुलझा लिया जाए. मगर उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर बात नहीं बनी तो फिर हड़ताल होगी. उन्होंने कहा,"अगर मामला हल नहीं हुआ तो दो सप्ताह बाद हम फिर हड़ताल करेंगे और उस बार ये तब तक जारी रहेगी जब तक कि कोई आख़िरी सहमति नहीं हो जाती". नाइजीरियाई राजधानी लागोस में मौजूद बीबीसी संवाददाता ऐना बोर्ज़ेलो का कहना है कि आम लोग वहाँ हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि तेल की कीमत कम होने से ही वहाँ स्थिति बेहतर हो सकती है. संवाददाता का कहना है कि इस सप्ताहांत वहाँ बाज़ार में चहल-पहल कुछ अधिक रही क्योंकि लोगों ने एहतियात के तौर पर आवश्यक चीज़ें जुटानी शुरू कर दी थीं. |
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