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सोमवार, 03 सितंबर, 2007 को 09:09 GMT तक के समाचार
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उपचुनावों में दो सीटों पर बसपा को जीत

उत्तर प्रदेश विधानसभा
जिन तीन सीटों पर चुनाव हुआ है वहाँ पहले सपा ने जीत हासिल की थी
उत्तर प्रदेश विधानसभा की तीन सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना के बाद दो सीटों पर बसपा और एक पर सपा प्रत्याशी विजयी घोषित किए गए हैं.

पिछले दिनों राज्य की तीन विधानसभा सीटों गुन्नौर, फ़र्रुखाबाद और स्वार-टांडा के लिए उपचुनाव हुए थे. ग़ौरतलब है कि तीनों सीटें समाजवादी पार्टी के पास थीं.

गुन्नौर से सपा प्रत्याशी प्रदीप यादव की जीत हुई है जबकि स्वार-टांडा से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी काज़िम अली ख़ान को जीत हासिल हुई है.

फ़र्रुखाबाद से बसपा प्रत्याशी अनंत कुमार मिश्र उर्फ़ अंतु मिश्र ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे विजय सिंह को 15000 मतों के अंतर से हरा दिया है.

बदायुं ज़िले की गुन्नौर विधानसभा सीट पर इसी वर्ष मई में हुए चुनावों में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह जीते थे पर उन्होंने भरथना से जीत हासिल करने के बाद इस सीट से इस्तीफा दे दिया था.

बदायुं ज़िले में सपा की झोली में आई यह अकेली विधानसभा सीट थी जिसपर उपचुनाव में भी सपा ने अपनी जीत कायम रखी है और सपा प्रत्याशी प्रदीप यादव ने बसपा प्रत्याशी दीपक यादव को हरा दिया है.

राजनीतिक उधेड़बुन

पिछले चुनाव के विपरीत इन उपचुनावों में तीन में से दो सीटें बसपा की झोली में आ गई हैं.

मुख्यमंत्री मायावती
मायावती ने फ़र्रुखाबाद में सार्वजनिक रूप से राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सलमान खुर्शीद की आलोचना की

रामपुर की स्वार-टांडा सीट से पहले सपा के काज़िम अली ख़ान जीतकर आए थे पर बसपा प्रमुख मायावती ने अपनी कूटनीति के चलते उन्हें बसपा में शामिल कर लिया और वो बसपा के टिकट पर यह उप चुनाव जीत हए हैं.

काज़िम ख़ान पुराने बसपाई रहे हैं पर पिछले चुनाव में सपा में शामिल हो गए थे. हालांकि सपा के वरिष्ठ नेता आजम खाँ से उनकी जुगलबंदी नहीं बैठी और उन्होंने वापस बसपा का दामन थाम लिया है.

काज़िम ख़ान ने इस उपचुनाव में सपा प्रत्याशी को लगभग 49000 वोटों से पराजित किया है.

पर सबसे रोचक चुनाव रहा फ़र्रुखाबाद का. वहाँ से सपा के टिकट पर पिछला चुनाव जीते विजय सिंह ने राज्य में मायावती सरकार बनने के बाद बसपा की सदस्यता ले ली.

विजय सिंह एक गंभीर अपराध में अदालत से सज़ा पा चुके हैं और पुलिस रिकार्ड में उनका मज़बूत आपराधिक इतिहास दर्ज है.

विजय सिंह राजनीतिक संरक्षण के लिए बसपा में आए तो पर उन्हें बसपा प्रमुख ने बाद में पार्टी ने निकाल दिया और उनकी जगह मायावती मंत्रिमंडल के सदस्य सतीश चंद्र मिश्र के क़रीबी अनंत कुमार मिश्र को टिकट दे दिया गया.

पर कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रमुख सलमान खुर्शीद ने अपने गृह जनपद के इस चुनाव में ख़ासी दिलचस्पी दिखाई और विजय सिंह को कांग्रेस से टिकट देकर पार्टी के लोगों को भी चौंका दिया.

इसपर राज्य की मुख्यमंत्री मायावती ने चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक सभाओं में सलमान खुर्शीद की निंदा और आलोचना भी की थी.

कांग्रेस के लिए अच्छा यह रहा कि उनका प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा जबकि सपा के प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहे.

अख़बार'माया में है दम'
दिल्ली, लखनऊ से प्रकाशित सभी अख़बार मायावती की जीत की ख़बरों से पटे हैं.
मायावती पोस्टरयूपी चुनावों के सबक
शशिशेखर का कहना है कि यूपी चुनावों ने बड़े परिवर्तन के संकेत दिए हैं.
राहुल गांधीरोडशो का जादू बेअसर
चुनाव नतीजों से साफ़ हो गया है कि सिर्फ़ रोडशो से ही जनता वोट नहीं देती.
भाजपा'भाजपा नहीं, संघ हारा'
रामबहादुर राय मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में भाजपा नहीं, आरएसएस की हार हुई.
पोस्टरसपा की हार के कारण
समाजवादी पार्टी ने वही ग़लती की जो भाजपा ने लोकसभा चुनाव में की थी.
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