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क़ानून-व्यवस्था के लिए 'अनोखी' पहल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने घोषणा की है कि राज्य की जनता पिछले तीन वर्षों के दौरान हुए अपराधों, शोषण या अत्याचार के मामले की प्राथमिकी एक महीने के अंदर दर्ज करा सकती है. शुक्रवार को क़ानून व्यवस्था की दिशा में कुछ नई घोषणाएँ करते हुए उन्होंने कहा कि वो अपराध मुक्त राज्य के अपने वादे को निभाने के लिए तैयार हैं. घोषणा में कहा गया है कि अगर पीड़ित लोग चाहेंगे तो राज्य में अगले एक महीने तक पिछले तीन वर्षों के दौरान हुए हर छोटे-बड़े अपराध की प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और पुलिस उस पर कार्रवाई करेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की पिछली समाजवादी पार्टी सरकार में जिन लोगों पर ज़ुल्म-ज़्यादती हुई है और उनकी एफ़आईआर भी दर्ज नहीं हुई है उन्हें न्याय पाने का मौक़ा दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए ज़िले स्तर पर कुछ विशेष काउंटर भी स्थापित किए जाएँगे और इसके लिए हर ज़िले के पुलिस प्रमुखों को विशेष निर्देश भी जारी किए गए हैं. 'कहाँ है दम' मुख्यमंत्री ने राज्य में पिछले महीने ख़त्म हुए चुनावों के दौरान समाजवादी पार्टी के उस नारे को भी आड़े हाथों लिया जिसमें कहा गया था कि यूपी में है दम, क्योंकि जुर्म यहाँ है कम. उन्होंने कहा, "पीड़ित लोगों की ओर से प्राथमिकी दर्ज होने और उन पर कार्रवाई होने से हो सकता है कि राज्य में अपराध के आँकड़ों में बढ़ोत्तरी होती नज़र आए, पर हमारा मक़सद लोगों को अपराध से मुक्ति दिलाना है न कि फ़र्ज़ी आँकड़ों की मदद से 'जुर्म यहाँ है कम' का नारा दोहराना." साथ ही पुलिस प्रशासन के काम के तरीक़े को लेकर भी निर्देश जारी किए गए. उन्होंने कहा, " रा्ज्य पुलिस के काम का आकलन उनके कार्यक्षेत्र में पंजीकृत मामलों के आधार पर नहीं होगा बल्कि मामलों के निपटारे, अपराधियों की गिरफ़्तारियाँ जैसे अन्य मानकों के आधार पर होगा.” उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को नई उम्र के बिगड़े युवकों को समझाने का काम भी करना होगा ताकि वे सही रास्ते पर लौट सकें. माना जा रहा है कि जहाँ इस घोषणा के राजनीतिक रंग आने वाले समय में देखने को मिल सकते हैं वहीं कई लोगों को राहत भी मिलेगी और साथ ही राज्यभर में का़नून व्यवस्था क़ायम करने संबंधी संदेश भेज पाने में भी मुख्यमंत्री मायावती सफल हुई हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें मेडिकल परीक्षा के नतीजे ग़लत थे20 जून, 2007 | भारत और पड़ोस मेडिकल परीक्षा के नतीजों पर रोक15 जून, 2007 | भारत और पड़ोस मायावती, मिश्र के ख़िलाफ़ याचिका ख़ारिज13 जून, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश में दलित की हत्या09 जून, 2007 | भारत और पड़ोस अमिताभ को हाईकोर्ट से राहत मिली08 जून, 2007 | भारत और पड़ोस चार हज़ार सज़ायाफ़्ता क़ैदी रिहा होंगे03 जून, 2007 | भारत और पड़ोस बसपा सांसद उमाकांत यादव गिरफ़्तार30 मई, 2007 | भारत और पड़ोस नोएडा में भूमि आवंटन की सीबीआई जाँच28 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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