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बुधवार, 30 मई, 2007 को 09:54 GMT तक के समाचार
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बसपा सांसद उमाकांत यादव गिरफ़्तार

मायावती
बसपा सांसद उमाकांत यादव थाने में सलाखों के पीछे
उत्तरप्रदेश में मछलीशहर-जौनपुर लोकसभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के सांसद उमाकांत यादव को मुख्यमंत्री के सरकारी बंगले से गिरफ़्तार कर लिया गया.

सांसद उमाकांत यादव की एक आपराधिक मामले में तलाश थी.

बीएसपी की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने अपने पार्टी सांसद को स्वयं गिरफ़्तार कराया.

पुलिस महानिदेशक जीएल शर्मा ने संवाददाताओं को बताया कि बीएसपी सांसद उमाकांत यादव और उनके साथियों ने सोमवार की रात आजमगढ़ के फूलपुर क्षेत्र में सड़क के किनारे बनी कुछ दुकानें बुलडोजर से गिरवा दी थी.

इन लोगों ने जान से मारने की नीयत से फ़ायरिंग भी की थी.

पुलिस ने मंगलवार को ही मुक़दमा कायम करके सांसद उमाकांत यादव और उनके बेटे दिनेश यादव व अन्य अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की कोशिश शुरू कर दी थी. लेकिन सांसद उमाकांत लखनऊ चले आए थे.

सांसद यादव मुख्यमंत्री मायावती से मिलने उनके आवास पहुँचे थे. मुख्यमंत्री ने सांसद उमाकांत से मुलाक़ात नहीं की और पुलिस बुलाकर उनको गिरफ़्तार करवा दिया.

बहुजन समाज पार्टी की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि मुख्यमंत्री मायावती ने अपराधियों से सख्ती से निपटने के अपने संकल्प को अमली जामा पहनाने के लिए यह नई मिसाल कायम की.

मायावती ने सांसद उमाकांत यादव को बहुजन समाज पार्टी से निलंबित कर दिया है और उनके बेटे दिनेश यादव को पार्टी से निकाल दिया गया है.

पुलिस महानिदेशक जीएल शर्मा का कहना है कि सांसद के बेटे व अन्य अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के प्रयास चल रहे हैं.

पुलिस महानिदेशक का कहना है कि सांसद पर गिरोहबंदी क़ानून का मुक़दमा भी चलेगा.

पुलिस महानिदेशक जी एल शर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अपने सांसद को गिरफ़्तार करवाकर पुलिस को साफ़ संकेत दिया है कि जो भी क़ानून तोड़ेगा वो बख्शा नहीं जाएगा.

उधर सांसद उमाकांत यादव का कहना है कि वह ज़मीन उन्होंने खरीदी थी और उस पर उनका मालिकाना हक़ है और उनको गलत ढंग से फंसाया गया है.

पिछले एक पखवाड़े से बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनने के बाद से कई ज़िलों से इस तरह की ख़बरें आईं थीं कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने खुलेआम फ़ायरिंग की है या फिर अपने विरोधियों को मारा-पीटा है.

मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी पार्टी के लोगों को कई बार हिदायतें दी थीं कि वे अनुशासन में रहें, पर उसका ज़्यादा असर नहीं हुआ.

प्रेक्षकों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई से विपक्ष को भी संदेश दिया है कि वो किसी को छोड़ेंगी नहीं.

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