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'कोई विधायक आएगा तो स्वागत है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सभी चुनावी सर्वेक्षणों और राजनीति के पंडितों का मत है कि उत्तरप्रदेश में इस बार का विधानसभा चुनाव बहुत काँटे का है. असली लड़ाई यह है कि नंबर एक पर कौन-सा दल रहता है- समाजवादी पार्टी और मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव या उनकी प्रमुख प्रतिद्वंदी मानी जाने वाली बहुजन समाज पार्टी की नेता सुश्री मायावती. कुछ कौतुहल बीबीसी की टीम में भी था और यही कौतुहल हमें लेकर पहुँचा शाहाबाद में जहाँ मुलायम सिंह यादव की एक रैली थी. जनसभा में कोई ख़ासी भीड़ नहीं थी. यही कोई 500-1000 के क़रीब लोग थे. जब मुलायम सिंह का हेलीकॉप्टर उतरा और मिट्टी उड़ी तो उसके साथ-साथ कुछ लोगों की और भीड़ आसपास के क्षेत्र से जुटी. फिर मुलायम सिंह ने बोलना शुरू किया. पत्रकारों का ख़ासा बड़ा दल भी वहाँ मौजूद था. दिल्ली से संपादकों की एक टोली भी आई हुई थी और बीबीसी की टीम भी वहाँ पर थी, स्थानीय पत्रकार भी थे. वादा..तेरा वादा पत्रकारों की इस जमात और छोटी-सी भीड़ को देखकर शायद मुलायम सिंह कुछ बह गए और अपने लंबे-चौड़े वायदों की फेहरिस्त अपने भाषण में गिना डाली. मुलायम कहते रहे- ये भी कर देंगे, वो भी कर देंगे. बेरोज़गारी भत्ता तिगुना कर देंगे यानी 500 से 1500 रुपए, बिजली का पुख्ता इंतजाम करेंगे, लड़कियों शिक्षा के लिए अलग से पैसा देंगे. और तो और, यह भी कहा कि जो लोग इमर्जेंसी में जेल गए उनके लिए भी एक निश्चित राशि मुहैया कराई जाएगी जो हर महीने दी जाएगी. रैली खत्म हुई और मुलायम सिंह हम लोगों यानी पत्रकारों की ओर मुखातिब हुए तो सब पत्रकारों के मन में भी कुछ सवाल जगे. सब चुनाव से जुड़े हुए भी नहीं थे. मुलायम सिंह की बाडी लैंग्वेज बता रही थी कि वो अगर हारे हुए नहीं भी हों तो एक थके हुए योद्धा की तरह लग रहे हैं. हमारे साथ कुछ स्थानीय पत्रकार भी थे. उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए है क्योंकि वो अब तक 125-150 जनसभाओं को संबोधित कर चुके हैं. शायद इसकी वजह से थकान और चेहरे पर कालापन नज़र आ रहा था. 'स्वागत है...' इसके बाद हमने मुलायम सिंह से बातचीत शुरू की और सबसे पहले यह पूछा कि सारे सर्वेक्षण कह रहे हैं कि चुनाव के बाद कई दल टूटेंगे, बिखरेंगे, नए समीकरण बनेंगे. आप भी क्या अगर अकेले सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हुए तो क्या दूसरे दलों को तोड़कर सरकार बनाएंगे?
मुलायम सिंह का जवाब कुछ इस तर्ज़ पर था, "तोड़-फोड़ हम करते नहीं और पहले भी हमने नहीं की थी, कोई अपने आप आएगा तो स्वागत है. ये बात कह रहे हैं प्रमोद तिवारी, जगदम्बिका पाल, कल्याण सिंह और अजीत सिंह. मैंने खुलेआम विधानसभा में कहा था कि मैं सरकार नहीं बनाना चाहता पर जब विधायक अपनेआप आ गए और पार्टी में शामिल हो गए तो मजबूरी हो गई सरकार बनाना. इसलिए अजीत सिंह, प्रमोद तिवारी हमसे नाराज हो गए." पर ये लोग आपसे क्यों नाराज हो जाते हैं, हमने पूछा. बेनी प्रसाद के नाम का ज़िक्र भी किया. इसपर मुलायम बोले, "रेलगाड़ी में कौन उतरे, कौन चढ़े, इससे फ़र्क नहीं पड़ता. रेलगाड़ी भरकर ही जाती है." मुलायम सिंह का कहना था कि सरकार बनाने के लिए ज़रूरत पड़ी तो वो ख़ुद विधायकों को नहीं तोड़ेगे लेकिन अगर आम आकर मुँह में गिरे तो निगलने से इनकार भी नहीं करेंगे. ये दोस्ती... बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और हमने बात की उनको छोड़कर गए नेताओं की. जैसे बेनी प्रसाद वर्मा और कुछ अन्य नेता जो नाराज़ हैं और कहते हैं कि ये पुराने दिनों की समाजवादी पार्टी नहीं रही. इसपर एक पत्रकार ने जोड़ा कि शायद इसका कारण अमर सिंह है जिनकी नेतृत्व शैली और जीवनशैली बहुत भव्य है एक समाजवादी पार्टी के लिए. जवाब में मुलायम सिंह यादव ने पूरी दोस्ती निभाई और अमर सिंह के बचाव में फौरन कुदे, "हमारी पार्टी में आने से पहले अमर सिंह की ज़िंदगी बहुत अच्छी थी. ये सच्चाई है, ऐसा हम देखते थे. कैसा विदेशी कपड़ा, कैसी खुशबू और बढ़िया खाना, बढ़िया पार्टी अटेंड करना, बढ़िया गाड़ी. अब शुगर की बीमारी भी हो गई. वो आर्थिक दृष्टि से भी बहुत कमज़ोर हो गए हैं." मुलायम सिंह पर एक और आरोप लगता है कि वो अपने भाई-भतीजे और बेटे से आगे नहीं देख पाते. हमने उनसे पूछा कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा? इसपर मुलायम सिंह का कहना था कि उत्तराधिकारी की बात तो अभी बहुत दूर की बात है. वो बोले, "अभी मै बुढ़ा नहीं हुआ हूँ. आप लोगों से ज़्यादा काम करता हूँ, अभी मैं स्वस्थ हूँ. कोई नौजवान नहीं कहेगा कि मैं 11 सभा करने जा रहा हूँ." इस बीच हमने उनसे पुराने कुश्ती-व्यायाम के शौक का भी ज़िक्र कर दिया. मुलायम बोले, "थोड़ा-बहुत आज भी करके आ रहा हूँ. अगर वो नहीं करेंगे तो बोल भी नहीं पाएंगे." मुलायम सिंह का कहना था कि जहाँ पर भी कांटे की टक्कर है और पाँच-दस हज़ार से चुनाव का फ़ैसला होना है, वहाँ वो बार-बार जाएंगे, जमकर मेहनत करेंगे और हारती हुई बाज़ी को पलटने की कोशिश करेंगे. | इससे जुड़ी ख़बरें मायावती की रणनीति से घर में घिरे अजित सिंह 13 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस चुनाव आयोग पर बरसे मुलायम07 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तर प्रदेश: विकास और बदलाव की चाह06 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी का फ़ैसला बहुत कुछ तय करेगा06 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस चुनावों में राज बब्बर की परीक्षा 01 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस किसानों को मुफ़्त पानी देने का वादा01 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी चुनावों में भाजपा की संभावना23 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस मुलायम सिंह की मुश्किलें19 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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