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चुनावों में राज बब्बर की परीक्षा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
समाजवादी पार्टी से अलग हुए फ़िल्म अभिनेता और आगरा से सांसद राज बब्बर की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अग्नि परीक्षा है. आगरा की सभी विधानसभा सीटों पर पहले चरण में सात अप्रैल को मतदान होना है. राज बब्बर समाजवादी पार्टी के नेताओं से मतभेदों के बाद उससे अलग हो गए थे और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह और अन्य कुछ दलों के साथ मिलकर संयुक्त प्रगतिशील जनमोर्चा को सक्रिय किया. लेकिन उनके अपने संसदीय क्षेत्र आगरा में उनकी असल परीक्षा है. उन्होंने यहाँ की सभी विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं लेकिन लोगों के उनकी सफलता पर संशय है. वरिष्ठ पत्रकार अनिल शुक्ला कहते हैं कि राज बब्बर स्वयं एक अराजनीतिक व्यक्ति हैं और उनसे ऐसे ही व्यक्ति जुड़े हुए हैं. उनका कहना है कि राज बब्बर की छवि साफ़ है और उनकी गिनती भ्रष्ट नेताओं में नहीं होती. अनिल शुक्ला कहते हैं,'' मुझे इस बात में शक है कि राज बब्बर के प्रत्याशी मुख्य मुक़ाबले में भी रह पाएँगे.'' दूसरी ओर जनमोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष उपेंद्र सिंह का कहना है कि राज बब्बर ने लोक सभा चुनाव ज़रूर समाजवादी पार्टी से लड़ा था लेकिन जीत उनके व्यक्तिगत प्रभाव के कारण हुई थी. उनका दावा है कि शहर के पाँचों विधानसभा क्षेत्रों में जनमोर्चा के उम्मीदवार बढ़िया तरीके से लड़ रहे हैं. कड़ा मुक़ाबला आगरा के प्रमुख रंगकर्मी जितेंद्र रघुवंशी कहते हैं कि राज बब्बर की छवि एक ईमानदार और जुझारू नेता की है. उनका कहना है कि जहाँ तक आगरा के चुनावों पर असर का सवाल है तो यह हमेशा बुनियादी मुद्दों पर नहीं लड़ा जाता है. वो कहते हैं कि जन मोर्चा अभी बनने की प्रक्रिया में है. उसके पास समर्थक हैं लेकिन सांगठनिक ढांचा नहीं है. चिकित्सक डॉक्टर सुधीर धाकरे का कहना है कि राज बब्बर ने व्यक्तिगत प्रयासों से समाजवादी पार्टी को आगरा में प्रवेश दिलवाया. वो कहते हैं कि यह कहना मुश्किल है कि उनकी पार्टी कितनी सीटें जीतेगी लेकिन इतना तो तय है कि वो समाजवादी पार्टी को ज़रूर नुक़सान पहुँचाएगी. |
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