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भाजपा को संघ-विहिप का वैसा साथ नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद इस बार उत्तर प्रदेश चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का पहले की तरह खुलकर साथ देते दिखाई नहीं दे रहे हैं. प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद आरएसएस के प्रवक्ता ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के चुनावों के बारे में न तो अलग से कोई चर्चा हुई और न कार्यकर्ताओं को चुनावों को लेकर कोई निर्देश दिए गए हैं. हालांकि सभा स्थल के बाहर विश्व हिंदू परिषद ने कुछ बैनर लगा रखे थे, जिसमें हिंदुओं से मतदान करने की अपील की गई थी. और दूसरी ओर भाजपा ने भी उत्तर प्रदेश के चुनाव में हिंदुत्व के मुद्दे को एक बार फिर सामने लाने के संकेत दिए हैं. लगता है कि भाजपा के केंद्र सरकार में रहने के दौरान संघ और विश्वहिन्दू परिषद से जो दूरियाँ पैदा हो गई थीं, वह अभी पाटी नहीं जा सकी हैं बैठक के बाद बुलाई गई पत्रकारवार्ता में कई बार कुरेदने के बावजूद भी भागवत राजनीतिक मुद्दों से बचते रहे. उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों के बारे में भी न अलग से कोई चर्चा हुई, और न ही स्वयंसेवकों को कोई निर्देश दिया जा रहा है. लेकिन पिछले कुछ सालों में संघ और विश्वहिन्दू परिषद कार्यकर्ता जिस तरह खुलकर भाजपा के पक्ष में अभियान चलाते थे, वैसा इस बार नहीं दिख रहा है. प्रस्ताव (आरएसएस) की सर्वोच्च नीति निर्धारक समिति सभा ने दो प्रस्ताव पारित किए हैं. एक प्रस्ताव में केन्द्र और राज्य सरकारों का आह्रवान किया गया है कि वे भूमंडलीकरण के वर्तमान दौर से भारत के आर्थिक हितों की रक्षा करें. प्रतिनिधि सभा ने अपने आर्थिक प्रस्ताव में कहा है कि भूमंडलीकरण का यह आर्थिक दौर साम्राज्यवादी है, जिससे समाज एवं संस्कृति पर बाज़ारवाद का शिकंजा कसता जा रहा है. संघ का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी जैसी सेवाओं का भी बाज़ारीकरण हो रहा है. आरएसएस प्रतिनिधि सभा ने प्रस्ताव में कहा कि इन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को प्रवेश और उन्हें अनियंत्रित अधिकार देने का षडयंत्र चल रहा है. एक अन्य प्रस्ताव में सामाजिक समरसता और सदभाव पर ज़ोर दिया गया है. इसके लिए सामाजिक न्याय और गरीब तबकों की आर्थिक स्थिति मज़बूत करने की वकालत की गई है. संघ के महासचिव मोहन भागवत ने एक सवाल के जवाब में माना कि हिन्दू समाज में अनेक कुरीतियाँ हैं जो धर्म परिवर्तन का कारण बनती हैं. पत्रकारों से बातचीत में श्री भागवत ने बताया कि पिछले वर्षों में अन्य कार्यों पर अधिक ध्यान देने से संघ की शाखाओं में लगभग चार हज़ार की कमी आई है. संघ की प्रतिनिधि सभा ने इस बार तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच प्रस्तावित सेतु समुद्रम नहर परियोजना का मार्ग बदलने और भगवान राम द्दारा बनाये गये रामसेतु की रक्षा का मुद्दा उठाया है. ऐसा लगता है कि संघ एक सोची समझी रणनीति के तहत राममंदिर के बजाय रामसेतु का मुद्दा उठा रहा है, जिससे दक्षिण भारत में पैर जमाने के लिए एक भावनात्मक अभियान चलाया जा सके. | इससे जुड़ी ख़बरें आरएसएस का नया मुद्दा - रामसेतु 10 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस आडवाणी का पद छोड़ने का फ़ैसला18 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस वैचारिक भटकाव पर संघ की चेतावनी09 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस भाजपा में युवा नेतृत्व का सवाल उठा30 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस भाजपा नेतृत्व: कौन हैं दावेदार20 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस भाजपा में अंतरकलह: कारण और परिणाम18 जून, 2004 | भारत और पड़ोस 'ब्रिटेन से मिला दान आरएसएस को'26 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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