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पहली महिला राष्ट्रपति बनीं प्रतिभा पाटिल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बन गई हैं. संसद के केंद्रीय कक्ष में भारत के पहले दलित मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने उन्हें पद की शपथ दिलाई. प्रतिभा पाटिल तकनीकी रुप से भारत की तेरहवीं राष्ट्रपति हैं. चूंकि पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इस पद पर दो कार्यकाल पूरे किए इसलिए राष्ट्रपति का पद संभालने वालों के लिहाज़ से वे बारहवीं ही हैं. शपथ लेने के बाद उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई. इसके पहले वे पारंपरिक ढंग से अंगरक्षकों के साथ डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के साथ संसद भवन तक पहुँचीं. समारोह में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गाँधी, विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के अलावा विभिन्न राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मोजूद थे. शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुआ और फिर चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति चुने जाने की घोषणा करने वाला पत्र पढ़कर सुनाया गया. इसके बाद उन्होंने अंग्रेज़ी में शपथ ली. शपथ ग्रहण के बाद निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और शपथ ले चुकी नई राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने आसन बदले. ग़रीबों-उपेक्षितों का हित इसके बाद राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने संक्षिप्त भाषण में कहा कि भारत तेज़ी से विकास कर रहा है लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि इस विकास का लाभ सभी को मिले. उन्होंने कहा, "इस विकास में ग़रीबों और उपेक्षित वर्ग को बराबर का भागीदार बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हरक्षेत्र इस विकास में बराबर का भागीदार हो."
ग़रीबों और उपेक्षितों की बात करते हुए उन्होंने मराठी संतकवि तुकाराम की पंक्तियाँ पढ़ीं जिसमें कहा गया है, "जो ग़रीबों-शोषितों को अपना मित्र बनाता है वही साधु कहलाता है क्योंकि ईश्वर उसी के साथ होता है." उन्होंने अपने आपको शिक्षा के प्रतिबद्ध बताते हुए कहा कि कहा कि स्त्री-पुरुष और लड़के-लड़कियों को बारबरी से शिक्षा मिले. उन्होंने कहा कि शिक्षा को आधुनिक और स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाना होगा. पहली महिला राष्ट्रपति बनी पाटिल ने कहा, "कुपोषण को ख़त्म करना होगा, बालमृत्यु और कन्याभ्रूण हत्या को रोकना होगा." उन्होंने विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देने पर ज़ोर देते हुए कहा कि इससे किसानों और उद्यमियों को लाभ होगा. उन्होंने कहा कि देश को सांप्रदायवाद, जातिवाद, उग्रवाद और आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुट होना होगा. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि इस समय जब देश 1857 के सैन्य विद्रोह की 150वीं वर्षगाँठ मना रहा है तब उन्हें याद आता है कि इस लड़ाई की एक विशेषता यह भी थी कि इसमें पुरुषों और महिलाओं ने मिलकर लड़ाई की. आज़ादी की साठवीं वर्षगाँठ का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी के अनूठे नेतृत्व में जवाहर लाल नेहरू, वल्लभ भाई पटेल, सरोजनी नायडू और मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. प्रतिभा पाटिल ने अपना पहला भाषण अंग्रेज़ी में दिया और फिर ख़ुद इसका हिंदी अनुवाद भी पढ़ा. इस भाषण के बाद प्रतिभा पाटिल को परंपरागत ढंग से राष्ट्रपति भवन पहुँचाया गया. जहाँ वे देश के संवैधानिक प्रमुख के रुप में पाँच साल रहेंगीं. |
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