|
चुनाव में अन्नाद्रमुक ने हिस्सा लिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के 13वें राष्ट्रपति को चुनने के लिए हुए मतदान में देश के सांसदों और विधायक ने हिस्सा लिया. लेकिन घोषणा के विपरीत तीसरे मोर्चे के कुछ घटक दलों ने मतदान में हिस्सा लिया. मतों की गिनती शनिवार को होगी और शाम तक परिणाम आ जाने की उम्मीद है. राष्ट्रपति चुनाव के प्रभारी पीडीटी आचारी ने बताया कि लोक सभा और राज्यसभा के 776 सदस्यों में से 682 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया और उनके मतदान का प्रतिशत 88.5 रहा. उन्होंने जानकारी दी कि देश के कुल 4120 विधायकों में से 3755 ने मतदान में हिस्सा लिया. इस तरह मतदान में 91 फ़ीसदी विधायकों ने हिस्सा लिया. आचारी ने बताया कि नौ राज्यों में 100 फ़ीसदी मतदान हुआ यानी सभी विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. अन्नाद्रमुक पलटी मतदान का बहिष्कार करने के तीसरे मोर्चे के फ़ैसले से पलटते हुए मोर्चे के घटक दलों अन्नाद्रमुक और एमडीएमके ने गुरुवार को मतदान में हिस्सा लिया. लेकिन अन्नाद्रमुक ने खुले तौर पर यह स्वीकार नहीं किया कि पार्टी किसे वोट दे रही है. अन्नाद्रमुक विधायक चेन्नई स्थित राज्य सचिवालय में वोट डालने आए और उन्होंने लंबी कतार में लगकर मतदान किया.
अन्नाद्रमुक अध्यक्ष जयललिता ने 14 जुलाई को घोषणा की थी कि संयुक्त राष्ट्रीय प्रगतिशील गठबंधन के सांसद और विधायक राष्ट्रपति चुनाव के मतदान से अलग रहेंगे. इसी तरह मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पाँच विधायकों ने पार्टी के फ़ैसले के विरुद्ध मतदान में हिस्सा लिया. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गुजरात में भाजपा के कुछ विद्रोही विधायकों ने यूपीए की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल के पक्ष में मत देने की बात कही. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की प्रमुख सोनिया गांधी मतदान करनेवाले शुरूआती लोगों में से थे. संसद में मतदान करने के बाद मनमोहन सिंह ने पत्रकारों की ओर दो उंगलियों से विजय चिन्ह दिखाया लेकिन इस बारे में कोई बात नहीं की. जयपुर से भाजपा सांसद गिरधारीलाल भार्गव का दावा था कि उन्होंने दिल्ली में सबसे पहले वोट डाला. इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों लालू यादव, कपिल सिब्बल, शिवराज पाटिल, शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया. मज़बूत स्थिति में पाटिल इसमें सीधा मुक़ाबला यूपीए-वाम मोर्चे की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल और निर्दलीय भैरों सिंह शेखावत के बीच है. भैरों सिंह शेखावत हालाँकि स्वतंत्र उम्मीदवार के रुप में मैदान में हैं लेकिन उन्हें विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई घटक दलों का समर्थन प्राप्त है.
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) खुल कर उनके साथ है लेकिन निर्वाचक मंडल की स्थिति के मुताबिक पाटिल के चुने जाने की संभावना अधिक है. भाजपा की मुहिम को उस समय और धक्का लगा जब तृणमूल कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने मतदान में हिस्सा नहीं लेने का फ़ैसला किया. इससे पहले एनडीए में शामिल शिव सेना शेखावत के बजाए प्रतिभा पाटिल को समर्थन देने की घोषणा कर चुकी है. प्रेक्षकों का कहना है कि इन चुनावों को आने वाले समय में सबसे कटु राष्ट्रपति चुनावों के रुप में ज़रुर याद किया जाएगा. |
इससे जुड़ी ख़बरें राष्ट्रपति चुनावों के लिए तैयारियां पूरी18 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस बंद सांसद-विधायक वोट डाल सकेंगे18 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस प्रतिभा-शेखावत के बीच सीधा मुक़ाबला03 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'सर्वोच्च पद की गरिमा कम न करें'04 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस राष्ट्रपति चुनाव से दूर रहेगा तीसरा मोर्चा14 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस भैरोसिंह शेखावत ने संपत्ति का ब्यौरा दिया14 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'तीसरे मोर्चे का फ़ैसला असंवैधानिक'16 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'चुनाव में व्हिप जारी करना ग़ैरक़ानूनी'17 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||