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धोखेबाज़ पति के ख़िलाफ़ मामला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बम्बई हाईकोर्ट के नागपुर खंडपीठ ने पुलिस से कहा है कि वह पत्नी को एचआईवी-एड्स से संक्रमित करने वाले डॉक्टर पति के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करे. अदालत ने पुलिस से कहा है कि वह पति के ख़िलाफ़ जानबूझ कर मारने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करे. मामला लखनऊ के एक डॉक्टर हर्षवर्धन की है. उनकी पत्नी अर्चना चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि उनके पति को शादी से पहले से एचआईवी-एड्स था और उन्होंने शादी से पहले इसकी सूचना नहीं दी और उन्हें भी संक्रमित कर दिया. अर्चना नागपुर की रहने वाली हैं और उनकी शादी सात साल पहले हुई थी. हाईकोर्ट के नागपुर खंडपीठ के न्यायाधीश दिलीप सिन्हा और न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी ने अर्चना चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं. जाँच की माँग अर्चना चतुर्वेदी आजकल अपने पिता के पास रहती हैं और उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता. अर्चना ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया कि जब शादी हुई थी तो उनके पति ने न उन्हें कुछ बताया और न उनके माता-पिता को कुछ बताया. वे बताती हैं कि पिछले साल जब उनकी तबियत ज़्यादा ख़राब रहने लगी तो उनके पिता गिरीश चौबे उन्हें लखनऊ से नागपुर लेकर आ गए थे. नागपुर में जाँच में पता चला कि वे भी एचआईवी संक्रमित हो गई हैं. उन्होंने कहा, "अब तो बहुत बुरा लगता है. जिसको कुछ न हो, उसे ऐसा हो जाए तो बुरा ही लगेगा." अर्चना की माँग है कि उनके पति हर्षवर्धन को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए. जबकि अर्चना के पिता गिरीश चौबे इस लड़ाई को आगे तक ले जाना चाहते हैं. उन्होंने बीसीसी से हुई बातचीत में कहा, "मैंने माँग की है कि कोई भी शादी होने से पहले भावी पति-पत्नी दोनों की पूरी मेडिकल जाँच होनी चाहिए जिसमें एचआईवी टेस्ट भी शामिल हो." वे इस मामले में एक जनहित याचिका दायर करने की भी तैयारी कर रहे हैं. केरल और आँध्रप्रदेश जैसे कुछ राज्यों में शादी से पहले लड़का-लड़की दोनों को मेडिकल जाँच करवाना ज़रुरी होता है. |
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