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एचआईवी पीड़ित महिला को निकाला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक महिला को झारखंड के एक अस्पताल से कथित रुप से इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि वह एचआईवी से पीड़ित थी. सरकार ने इस मामले की जाँच करवाने के आदेश दिए हैं. जमशेदपुर के इस अस्पताल को नोटिस भी भेजा गया है. अधिकारियों ने राज्य के एड्स नियंत्रण सोसायटी से कहा है कि वह इस मामले की स्वतंत्र जाँच करे. हालांकि महात्मा गाँधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ने इस बात से इनकार किया है कि अस्पताल से महिला को निकाला गया था. जमशेदपुर ज़िले के अधिकारियों के अनुसार यह महिला गर्भवती थी और उसे किसी भी वक्त बच्चा होने वाला था. डॉक्टरों ने उसे ऑपरेशन करवा लेने की सलाह दी थी. जब ऑपरेशन की तैयारियों के बीच जाँच का काम चल रहा था तभी पता चला कि वह एचआईवी संक्रमित है. इसके बाद महिला को बार-बार कहा गया कि वे अस्पताल छोड़ दें. ख़बरें हैं कि इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उस कंबल को जिसका उपयोग वह महिला कर रही थीं और उसके इलाज के वक़्त उपयोग में लाए गए दास्तानों को जला दिया गया. इनकार अस्पताल के सुपरिंटेडेंट डॉक्टर एके वर्मा ने इन आरोपों का खंडन किया है कि अस्पताल से महिला को निकाला गया. उनका कहना था, "डॉक्टरों ने इसकी जाँच की और उनसे उनके पुराने मेडिकल रिकॉर्ड्स के बारे में पूछा." "इसके बाद उन्हें सलाह दी गई कि वे नए सिरे से अपने ख़ून की जाँच करवा लें, बस इसके बाद न तो वह महिला दिखाई पड़ीं न ही वो लोग जो उनके साथ आए थे." वर्मा का कहना था कि इस समय भी अस्पताल में ऐसे तीन मरीज़ों का इलाज किया जा रहा है जो एचआईवी संक्रमित हैं. लेकिन एड्स सोसायटी के विशेष अधिकारी डीपी तनेजा का कहना था कि उन्हें इसी तरह की शिकायतें राज्य के कुछ और अस्पतालों से भी मिली हैं. एड्स नियंत्रण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह ज़िम्मा राज्य सरकारों को दिया गया है और इसके लिए बड़ी धन राशि भी मुहैया करवाई जा रही है. जमशेदपुर के उपायुक्त का कहना था कि इस तरह की ख़बरों से सरकार के प्रयासों को धक्का पहुँचता है. |
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