BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 29 नवंबर, 2004 को 21:54 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
यात्रा एक मक़सद के लिए
बलवंत
पंजाब में जन्मे बलवंत कई साल पहले ब्रिटेन आ गए थे
ब्रिटेन में रहने वाले एक 68 वर्षीय सिख व्यक्ति बलवंत गरेवाल ने कैंसर और एड्स के शोध के लिए 10 लाख पाउंड इकट्ठा करने का फ़ैसला किया है.

इस काम के लिए वे भारत के उत्तरी शहर अमृतसर से कन्याकुमारी तक चार हज़ार किलोमीटर का रास्ता चलकर तय कर रहे हैं.

1993 में ब्रितानी महिला फ़ियोना कैंपबल ने इसी काम के लिए अफ़्रीक़ा के उत्तर से लेकर दक्षिण तक का रास्ता तय किया था. उन्हीं से प्रेरणा लेकर बलवंत गरेवाल ने ये फ़ैसला किया.

भारत के पंजाब राज्य में जन्मे बलवंत कई साल पहले ब्रिटेन आ गए थे जहाँ उन्होंने रियल इस्टेट का काम शुरू किया.

बलवंत ने बीबीसी को बताया, "फ़ियोना कैंपबल ने अफ़्रीक़ा का रास्ता तय किया था जहाँ 20 प्रतिशत जनसंख्या को एचआईवी एड्स का ख़तरा है. मैं दुनिया का ध्यान भारतीय उप-महाद्वीप पर लाना चाहता हूँ जहाँ स्थिति उतनी ही गंभीर है."

उन्होंने कहा कि जब उन्हें ये पता चला कि उनके पड़ोस में रहने वाले पोलिश आप्रवासी को कैंसर है, तब ही से उन्होंने इस बीमारी के लिए कुछ करने की ठानी.

उन्होंने कहा, "हम क़रीबी दोस्त नहीं थे, मगर वे रोज़ सुबह मुझे मुस्कुराते हुए मिलते थे. जब मुझे पता चला कि वे मरने वाले हैं तब मैं सोचने लगा."

बलवंत गरेवाल को उनकी कोशिशों का फल भी मिलने लगा है. ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय लोगों ने एक लाख पाउंड का योगदान भी कर दिया है.

बलवंत ने कहा, "भारत में लोग एड्स के बारे में बात करने में भी कतराते हैं मगर वो खुले दिल के हैं. कई तो पहले ही पैसा दे चुके हैं."

बलवंत गरेवाल को पूरा विश्वास है कि वो इस महत्त्वपूर्ण कार्य को पूरा कर पाएंगे.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>