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मंगलवार, 10 जुलाई, 2007 को 10:23 GMT तक के समाचार
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उलटा पड़ा स्टेडियम गिराने का फ़ैसला

मायावती
मायावती अंबेडकर स्मारक को प्राथमिकता दे रही हैं
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को भीमराव अंबेडकर स्टेडियम मामले में सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि स्टेडियम से हटाए गए लोगों को फिर से कब्ज़ा दिलाया जाए.

साथ ही अगली सुनवाई तक यशास्थिति बनाए रखने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं. इस मामले में अगली सुनवाई 19 जुलाई को होनी है.

ग़ौरतलब है कि सोमवार को उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के एक मौखिक आदेश पर लखनऊ के गोमती नगर स्थित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स को गिराने का प्रयास प्रशासन की ओर से किया जा रहा था.

पर प्रशासन ऐसा इसलिए नहीं कर पाया क्योंकि एक असाधारण घटनाक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने खेल प्रेमियों की गुहार पर देर रात सुनवाई कर स्टेडियम को गिराने के मायावती सरकार के क़दम पर रोक लगा दी थी.

खंडपीठ ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार इस मामले में शपथ पत्र पर अपना जवाब दे. साथ ही याचिकाकर्ता को भी प्रत्योत्तर के लिए तीन दिन का मौका दिया गया है.

सुनवाई

अधिवक्ता प्रदीप खरे की ओर से इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर मंगलवार सुबह तीन बजे ही जस्टिस प्रदीप कांत के घर पर सुनवाई हुई जिसमें न्यायमूर्ति डीपी सिंह भी बैठे और इस परिसर को गिराए जाने पर मंगलवार दोपहर 12 बजे तक रोक लगा दी.

दिन की सुनवाई के लिए अदालत ने इस मामले से संबंधित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत स्तर पर तलब किया.

मायावती
अधिकारियों का कहना है कि ऐसा मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश पर हो रहा था

सरकार से जब इस कार्रवाई की वजह पूछी गई तो उनकी ओर से तर्क आया कि इस परिसर पर चरमपंथी हमले का ख़तरा था और वहाँ कुछ अराजक तत्व घुस गए थे इसलिए बड़ी तादाद में वहाँ पुलिस तैनात करनी पड़ी थी.

इसपर खंडपीठ ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित अदालत में पेश आला-अधिकारियों की खिंचाई की और कहा कि अधिकारी झूठ बोलने से बाज आएं. न्यायाधीशों ने बताया कि उन्होंने ख़ुद टेलीविज़न चैनलों के माध्यम से सरकार के क़दम को देखा है.

मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में तिल रखने को भी जगह नहीं थी.

यह कैसी योजना?

भीमराव अंबेडकर कॉम्पलैक्स को मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश पर सोमवार को रातोंरात खाली करवाया जा रहा था. इसके लिए वहाँ रह रहे कर्मचारियों को कोई समय भी नहीं दिया गया था.

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स नाम का यह स्टेडियम अंबेडकर स्मारक के पास स्थित है जिसे मायावती ने अपने पिछले कार्यकाल में 150 करोड़ रुपए की लागत से बनवाया था.

मौजूदा बजट में भी तकरीबन 350 करोड़ रुपए रुपए अंबेडकर स्मारक के विस्तार और सौंदर्यीकरण के लिए रखे गए हैं.

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस स्टेडियम को हटाकर यहाँ पर अपने राजनीतिक गुरू कांशीराम की स्मृति में स्मारक स्थल का निर्माण करवाना चाह रही थीं.

राज्य सरकार के इस क़दम से नाराज़ शहर के कई खेल प्रेमियों ने स्टेडियम को तोड़ने का विरोध किया. लोगों ने इसे तानाशाही भरा फ़ैसला बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की.

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