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राष्ट्रपति चुनाव में मायावती यूपीए के साथ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने आख़िर अपनी रणनीति उजागर करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में उनकी पार्टी यूपीए के प्रत्याशी का समर्थन करेगी. वहीं दिल्ली में मंगलवार को वामदलों की भी इस दिशा में एक अहम बैठक हुई जिसके बाद कहा गया है कि बुधवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि से और बातचीत के बाद ही किसी नाम की घोषणा की जा सकती है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए जिस तरह के व्यक्ति की ज़रूरत है उसपर हमारे बीच में आम सहमति है. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया और कहा कि इस बारे में बुधवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि के साथ बातचीत के बाद ही कोई घोषणा की जाएगी. वामदलों की इस बैठक से पहले मुख्यमंत्री मायावती ने बताया कि राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर उनकी यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से 11 जून की रात एक लंबी बातचीत हुई और कई नामों पर विचार किया गया जिसके बाद राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के नाम पर दोनों के बीच सहमति बन गई है. हालांकि मायावती ने यूपीए की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के नाम को बताने से मना कर दिया और कहा कि इसकी घोषणा यूपीए अध्यक्ष की ओर से ही की जाएगी. मायावती ने मंगलवार को दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी किसी सांप्रदायिक ताक़त को अपना समर्थन नहीं देना चाहती और इसीलिए इस बात का प्रश्न ही नहीं पैदा होता कि इस चुनाव में एनडीए के किसी भी प्रत्याशी को समर्थन दिया जाए. ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का कार्यकाल पूरा हो रहा है और इसलिए नए चुनाव के लिए राजनीति तेज़ हो गई है. एकमत नहीं जी-8 देशों की बैठक से लौटने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि राष्ट्रपति चुनाव में इसबार एनडीए को यूपीए प्रत्याशी को अपना समर्थन देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछली बार कांग्रेस ने राष्ट्रपति पद के चुनाव में उनके प्रत्याशी का समर्थन किया था.
हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने इसपर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से ऐसा कहा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है और उनकी पार्टी यूपीए प्रत्याशी को अपना समर्थन नहीं देगी. राजनीतिक दलों के बीच इस मसले पर कोई आम सहमति बनती नज़र नहीं आ रही है और एनडीए यूपीए के बीच गतिरोध जारी है. अब तक के समीकरण देखकर लगता है कि कांग्रेस की ओर से शिवराज पाटिल का नाम अब सबसे आगे है. हालांकि उनके नाम पर यूपीए के कुछ घटक दलों को आपत्ति है और यूपीए को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दल भी उनके नाम से सहमत नहीं हैं. समझा जाता है कि वामपंथी दलों ने अपनी ओर से विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को समर्थन देने को तैयार हैं लेकिन कांग्रेस ने इसमें ज़्यादा रुचि नहीं दिखाई हैं. इसी कड़ी में बुधवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी से मुलाक़ात करनेवाले हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीति तेज़11 जून, 2007 | भारत और पड़ोस कौन बनेगा भारत का अगला राष्ट्रपति?09 जून, 2007 | भारत और पड़ोस राष्ट्रपति चुनावों को लेकर राजनीति तेज़28 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'केंद्र के साथ सहयोग के रास्ते पर चलेंगे'26 मई, 2007 | भारत और पड़ोस राष्ट्रपति चुनावों के लिए सरगर्मियां तेज़25 मई, 2007 | भारत और पड़ोस मायावती ने की सोनिया से मुलाक़ात25 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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