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मायावती ने की सोनिया से मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने शुक्रवार की शाम यूपीए की चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात की है. उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजे आने के बाद मायावती की सोनिया गाँधी से यह पहली मुलाक़ात थी. हालांकि इसे औपचारिक मुलाक़ात कहा गया है लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अहम चर्चा हुई है. मायावती शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगी. चौथी बार उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पहली बार दिल्ली पहुँची मायावती ने इससे पहले कहा कि पूर्व की सरकार के सभी 'नियम विरुद्ध और जनविरोधी' फ़ैसलों की समीक्षा की जाएगी. मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद पहली बार दिल्ली पहुँची मायावती ने स्पष्ट किया कि उनका कोई भी फ़ैसला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित नहीं होगा बल्कि उन्हीं मामलों पर पुनर्विचार किया जाएगा जो जनता के हित में नहीं हैं या फिर ग़लत तरीक़े से किए गए हैं. राष्ट्रपति चुनाव जैसा कि पहले कहा गया था, मायावती और सोनिया गाँधी के बीच मुलाक़ात चाय पर होनी थी. लेकिन चाय पर होनी वाली मुलाक़ात थोड़ी लंबी चली और दोनों नेता एक घंटे से भी अधिक समय तक चर्चा करते रहे.
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार का मसला अहम रहा होगा. ऐसा मानना स्वाभाविक भी है क्योंकि उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों ने साफ़ कर दिया है कि राष्ट्रपति चुनाव में मायावती की भूमिका निर्णायक होगी. मायावती ने सोनिया गाँधी से मुलाक़ात के बाद बात नहीं की. लेकिन दोपहर को वे कह चुकी थीं कि इस संबंध में उन्होंने अभी कोई फ़ैसला नहीं किया है और वो समय आने पर 'अपने पत्ते खोलेंगी'. उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और विभिन्न ज़िलों के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है जिसके बाद पार्टी के सांसद और उत्तर प्रदेश के विधायक इस बारे में फ़ैसला करेंगे. हालांकि शाम को इस बैठक के बाद भी कोई ख़बर नहीं मिली. लेकिन विश्लेषक उस संकेत को मायावती का मन बताने के लिए पर्याप्त मानते हैं जिसमें उन्होंने कहा, "हम यूपीए के घटक दल नहीं हैं लेकिन सांप्रदायिक ताक़तों को रोकने के लिए हम सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे." इसका मतलब यह भी निकाला जा रहा है कि कम से कम मायावती एनडीए के किसी उम्मीदवार को तो समर्थन नहीं देंगी. | इससे जुड़ी ख़बरें मायावती को संघ का सर्टिफ़िकेट12 मई, 2007 | भारत और पड़ोस मायावती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली13 मई, 2007 | भारत और पड़ोस पद संभालते ही प्रशासनिक फेरबदल शुरू13 मई, 2007 | भारत और पड़ोस सतीश मिश्रा मंत्रिमंडल में शामिल16 मई, 2007 | भारत और पड़ोस राज्यपाल के भाषण पर सपा का एतराज़21 मई, 2007 | भारत और पड़ोस गोरखपुर धमाके एक साज़िश: मायावती23 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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