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माओवादियों ने झारखंड को ठप्प किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
माओवादियों की आर्थिक नाकेबंदी का झारखंड में व्यापक असर हुआ है और इसकी वजह से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. वहा रेल यातायात ठप है और राज्य भर में बसें और ट्रक भी नहीं चल रहे हैं. कोयला खदानों में काम प्रभावित हुआ है. अनुमान है कि एक ही दिन में सरकार को दो सौ करोड़ रुपए से अधिक का नुक़सान हुआ है. उधर माओवादियों के एक समूह ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक स्टेशन को आग लगा दी है. इसके कारण मंगलवार की रात से कोलकाता-दिल्ली मुख्य मार्ग पर कई मुख्य रेलगाड़ियाँ रद्द कर दी गई हैं. माओवादियों ने बिहार, झारखंड और उड़ीसा में सोमवार की रात से 48 घंटे की आर्थिक नाकेबंदी की घोषणा की है. लेकिन इसका असर छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और आँध्र प्रदेश में भी दिखाई पड़ा है. बिहार और छत्तीसगढ़ में भी माओवादियों ने कई घटनाओं को अंजाम दिया है. माओवादी केंद्र और राज्य सरकारों की आर्थिक नीतियों और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) की स्थापना का विरोध कर रहे हैं. रेलकर्मियों को पीटा बीबीसी के पश्चिमोत्तर संवाददाता सुबीर भौमिक के अनुसार पुरुलिया के बारामती स्टेशन पर मंगलवार की रात कोई 50-60 माओवादियों का एक दल पहुँचा. अधिकारियों के अनुसार पहले तो माओवादियों ने स्टेशन कर्मचारियों की बहुत पिटाई की, फिर उन्होंने स्टेशन को आग लगा दी. अधिकारियों का कहना है कि जाते-जाते माओवादी स्टेशन में बारूदी सुरंग लगाकर चले गए. बीबीसी संवाददाता के अनुसार बारामती स्टेशन कोलकाता-दिल्ली मार्ग का स्टेशन है और इस स्टेशन पर हुई घटना के बाद इस मार्ग की कई प्रमुख रेलगाड़ियों को रद्द करना पड़ा है. उनका कहना है कि क्षेत्र में आतंक का माहौल है क्योंकि घटना के बाद माओवादियों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के नेताओं से मिलकर उनसे पार्टी छोड़ने की अपील की है. झारखंड ठप्प सोमवार की रात से शुरू हुई इस आर्थिक नाकेबंदी का मंगलवार की सुबह से झारखंड में व्यापक असर दिखने लगा था.
बीबीसी के झारखंड संवाददाता सलमान रावी ने ख़बर दी है कि माओवादी न यात्री रेलगाड़ियों को चलने दे रहे हैं और न मालगाड़ियाँ ही चल पा रही हैं. इससे कई ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या उनके मार्ग बदल दिए गए हैं. इसकी वजह से अनेक स्थानों पर यात्री फँसे हुए हैं. उनके अनुसार में 18 सौ बसें सोमवार की रात से ही खड़ी हुई हैं. वे न राज्य के भीतर चल रही हैं और न राज्य के बाहर जा रही हैं. माओवादियों ने ट्रकों को भी जहाँ-तहाँ रोक दिया है. इस बंद के चलते कोयला और बॉक्साइट सहित कई खनिजों की ढुलाई प्रभावित हुई है और अनुमान है कि एक ही दिन में सरकार को दो सौ करोड़ रुपए से अधिक का नुक़सान हुआ है. सोमवार की रात माओवादियों ने चतरा में रेलपटरी को उड़ा दिया था. अधिकारियों का कहना है कि इसे ठीक करने में कम से कम दो दिन का समय लगेगा. तब तक कोल इंडिया कॉर्ड (सीआईसी) मार्ग पर यातायात बंद रहेगा. बीबीसी संवाददाता के अनुसार सोमवार की रात हुई हिंसक घटनाओं के बाद मंगलवार को हिंसा की छुटपुट घटनाएँ हुई हैं. जैसे कि चतरा में एक जगह बारातियों को उतारकर बस को आग लगा दी गई. राज्य में सुरक्षा की व्यवस्था की गई है. राज्य के उपमुख्यमंत्री सुधीर महतो ने बीबीसी को बताया कि महत्वपूर्ण स्टेशनों और स्थानों पर तो सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं लेकिन उनका कहना है कि दूरस्थ इलाक़ों में सुरक्षा बल तैनात करना संभव नहीं दिखता. | इससे जुड़ी ख़बरें छत्तीसगढ़ में पुलिस पर बड़ा हमला28 मई, 2007 | भारत और पड़ोस झारखंड में माओवादी हमला, छह मौतें07 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस छत्तीसगढ़ में शीर्ष नक्सली नेता ग़िरफ़्तार06 मई, 2007 | भारत और पड़ोस बारुदी सुरंग में विस्फोट, तीन की मौत26 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादियों के बंद से जनजीवन प्रभावित20 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस बारूदी सुरंग में विस्फोट, आठ की मौत01 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस बारूदी सुरंग फटने से सात सुरक्षाकर्मी मरे16 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस माओवादियों का ट्रेन पर हमला10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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