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भैरोसिंह शेखावत ने नामांकन दाखिल किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए सोमवार को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है. भैरोसिंह शेखावत एनडीए के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करने पहुँचे. उनके साथ नामांकन दाखिल करते समय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेता मौजूद थे. इसके अलावा शरद यादव, नवीन पटनायक सहित एनडीए के घटक दलों के भी नेता उनके नामांकन के वक्त मौजूद थे. इससे पहले रविवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने कहा कि 25 जून की तारीख़ बहुत ही प्रासंगिक है क्योंकि इसी दिन वर्ष 1975 में देश में आपातकाल लगा था. खुलेंगे पत्ते उधर माना जा रहा है कि शिवसेना की ओर से सोमवार को यह घोषणा हो सकती है कि राष्ट्रपति पद के लिए वे किसका समर्थन करेंगे.
शिवसेना की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि एनडीए के घटक होने के बावजूद वे भैरोसिंह शेखावत के नामांकन का समर्थन करेंगे या नहीं. इस बारे में पहले शिवसेना के स्थापना दिवस यानी 19 जून को घोषणा की जाने की बात कही गई थी पर इस घोषणा को टाल दिया गया. इस बीच भाजपा की ओर से गोपीनाथ मुंडे की शिवसेना नेताओं के साथ लंबी बातचीत हुई है पर कुछ भी घोषणा नहीं की गई है. दरअसल, शिवसेना ने अपने मुखपत्र में कहा था कि मराठी मूल की प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाना गर्व की बात है. इसके बाद से ही यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि शिवसेना क्षेत्र के आधार पर प्रतिभा पाटिल को समर्थन देगी या फिर एनडीए का समर्थन प्राप्त भैरोसिंह शेखावत को समर्थन देगी. आमने-सामने
इससे पहले शनिवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए और वाम दलों की साझा उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के चुनाव लड़ने से इनकार करने के बाद 19 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में शेखावत और प्रतिभा पाटिल के बीच मुख्य मुकाबला रह गया है. आपातकाल लागू होने की तारीख पर नामांकन करने के पीछे की मंशा समझाते हुए एनडीए प्रवक्ता सुषमा स्वराज ने कहा, ''भले ही घोषित रूप से देश में आपातकाल न लगाया गया हो लेकिन परिस्थितियां वैसी ही हैं. राष्ट्रपति भवन में एक परिवार के वफादार को बैठाने की कोशिश हो रही है और शेखावत जी इसी सोच के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहे हैं.'' हालांकि आंकड़ों के लिहाज से प्रतिभा पाटिल का पलड़ा भारी दिख रहा है लेकिन सुषमा स्वराज ने कहा कि अभी चुनाव होने में तीन सप्ताह बाकी है और तब तक बहुत कुछ बदलेगा. |
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