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राजस्थान के 11 ज़िलों में रासुका लागू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और गूजर समाज के बीच कई घंटे की बातचीत में कोई फ़ैसला नहीं हो सका है जबकि उधर राज्य के 11 ज़िलों में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगा दिया गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत ज़िलाधीशों को हिंसा पर नियंत्रण करने के लिए और अधिक अधिकार मिल जाएंगे. अगले तीन महीने तक हिंसाग्रस्त 11 ज़िलों में यह क़ानून लागू रहेगा. उधर गूजर समाज के नेताओं के साथ बातचीत के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा कि गूजर समाज के प्रमुख नेता किरोड़ी सिंह बैसला की उपस्थिति के बिना वार्ता नहीं हो सकती. बैंसला को बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है लेकिन बैंसला के निकटतम सहयोगियों का कहना है कि बैंसला धरनास्थल छोड़ कर कहीं नहीं जाएंगे. उन्हें बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है और रविवार को बातचीत आगे होगी. किरोड़ी सिंह बैसला अभी धरने पर बैठे हैं. अभी ये पता नहीं चल पाया है कि वे बातचीत के न्यौते को स्वीकार करते हैं या नहीं. पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा, "हमने गूजर समाज के बल को नहीं बात को महत्व दिया है." उनहोंने पिछले दिनों आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिवारजनों को पाँच-पाँच लाख मुआवज़ा देने की घोषणा की गई है. पिछले कुछ दिनों से इन ज़िलों में गूजरों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने को लेकर हिंसक आंदोलन हो रहे हैं. एक समय ऐसा लग रहा था कि बातचीत हो ही नहीं पाएगी लेकिन राज्य सरकार के दो मंत्रियों ने गूजर नेताओं को बातचीत के लिए मना लिया. दरअसल गूजरों के प्रतिनिधियों में शामिल रूप सिंह ने अचानक राज्य के खाद्य मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की गिरफ़्तारी की माँग रख दी जिसको लेकर बातचीत टलने के आसार बन गए थे. इससे पहले राज्य सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों की समिति और गूजर प्रतिनिधियों के बीच तीन दौर की वार्ता विफल रही. इस बीच पाँच दिनों से जारी हिंसा के बाद राजस्थान में हालात थोड़े सुधरे हैं लेकिन तनाव बरकरार है. दूसरे राज्यों से राजस्थान आए लोगों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है. इसी कड़ी में जयपुर से 16 बसें भारी सुरक्षा इंतज़ामों के बीच दिल्ली के लिए रवाना की गई है. हालाँकि प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात अभी भी सामान्य नहीं हुआ है और रेल सेवा भी बाधित है. उम्मीद की किरण मुख्यमंत्री और गूजर नेताओं के बीच होने वाली सीधी बातचीत से लोगों में समस्या के समाधान के प्रति उम्मीद की किरण जगी है.
इसे वसुंधरा राजे की राजनीतिक कौशल का इम्तहान भी माना जा रहा है. इस बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हिंसा के विरोध में गांधीवादी नेता सुब्बाराव के साथ अनशन पर बैठ गए हैं. राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वो अनुसूचित जनजाति के तहत मिलने वाली आरक्षण सुविधा की माँग कर रहे हैं. तो दूसरी ओर अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त मीणा समुदाय इसका विरोध कर रहा है. इस बीच प्रशासन अपनी तरफ़ से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 33 कंपनियाँ और सेना के जवान सभी संवेदनशील इलाक़ों में तैनात हैं. मंगलवार को गूजरों के आंदोलन ने हिंसक रूख़ अख़्तियार कर लिया था और अब तक इस हिंसा में 23 लोग मारे जा चुके हैं. जानकारों का कहना है कि स्थितियाँ संभाल पाने में राज्य सरकार जिस तरह से नाकाम रही है उससे मुख्यमंत्री की कुर्सी संकट में आ सकती हैं. राजस्थान की राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उनकी ओऱ से राज्य की शांति व्यवस्था पर एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई है. |
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