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गूजर-मीणा समुदाय में झड़पें, पाँच मरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में आख़िर वही घटने लगा जिसकी आशंका जताई जा रही थी. वहाँ अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने माँग कर रहे गूजर समुदाय और इसका विरोध कर रहे मीणा समुदाय में जगह-जगह झड़पें शुरु हो गई हैं. सबसे हिंसक संघर्ष दौसा ज़िले के लालसोट में हुआ है जिसमें ग़ैरसरकारी सूत्रों के अनुसार नौ लोगों की मौत हुई है लेकिन पुलिस अधिकारी पाँच लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि कम से कम 17 लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा दौसा, कसौली सहित कई ज़िलों में कई जगह दोनों समुदायों के बीच झड़पों की ख़बरें हैं. प्रशासन सवाईमाधोपुर, कसौली और भरतपुर में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं. मंगलवार को शुरु हुए इस विवाद के चलते अब तक कुल 23 लोगों को मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है. 14 लोगों की मौत मंगलवार को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फ़ायरिंग से हुई थी. चार लोगों की मौत सवाईमाधोपुर में गुरुवार को हुई हिंसा के दौरान हुई थी. तनाव इस बात की चिंता पहले ही जताई जा रही थी कि यह मामला मीणा समुदाय और गूजरों के बीच सामुदायिक संघर्ष का रुप ले सकता है. और इसी बीच ख़बरें आई हैं कि दौसा के लालसोट में तनाव ने हिंसा का रुप ले लिया है. ख़बरें हैं कि हज़ारों लोगों ने घेराबंदी कर रखी थी और एक-दूसरे के इलाक़े में लोगों को जाति पूछे बग़ैर जाने नहीं दे रहे थे. अचानक दोनों समुदायों के बीच हिंसा शुरु हो गई और पुलिस हिंसक भीड़ को संभाल नहीं पाई. मरने वालों के बारे में विवरण नहीं मिल सके हैं. इसके अलावा भी एक-दो जगह से दोनों समुदायों के बीच झड़पों की भी ख़बरें मिली हैं. सरकार की एक समिति और गूजर नेताओं के बीच बुधवार और गुरुवार को दो दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन इसका कोई हल नहीं निकल सका है. तीसरे दौर की बातचीत शुक्रवार को होनी तय थी लेकिन शाम तक बातचीत शुरु नहीं हो सकी थी. सरकार में मतभेद लेकिन राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार भी इस मुद्दे पर एकमत नज़र नहीं आ रही है. गूजर समुदाय और मीणा समुदाय के मंत्री अलग-अलग भाषा बोल रहे हैं.
राज्य के खाद्य मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा है कि मीणा समुदाय किसी भी सूरत में अनुसूचित जनजाति के दायरे में विस्तार स्वीकार नहीं करेगा. उनका कहना है, "इस मामले पर मीणा समुदाय के सभी विधायक एकमत हैं. हम मीणाओं को प्राप्त आरक्षण के साथ किसी तरह की छेड़खानी बर्दाश्त नहीं करेंगे." तो दूसरी ओर सरकार में गूजर समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कालूलाल गूजर का कहना है कि राज्य सरकार को इस माँग पर विचार करना चाहिए. अब तक अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल गूजरों का कहना है कि उन्हें इस वर्ग में रहकर आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है और अब उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाना चाहिए. तनाव मीणा समुदाय के प्रतिनिधियों की दौसा में लगातार बैठकें हो रही हैं और वो लामबंद हो रहे हैं. उन्होंने कहा है कि अगर राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बहाल नहीं हुआ तो वे ख़ुद कार्रवाई करेंगे. राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने स्वीकार किया है कि उन्होंने पिछले 50 वर्षों में राज्य में ऐसी हिंसा नहीं देखी. राज्य सरकार ने भरतपुर के हिंसाग्रस्त बयाना और सवाई माधोपुर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं. गूजर नेता विक्रम सिंह का कहना है कि राज्य सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है और वो इस मामले को तूल दे रही है. उन्होंने कहा, "अगर राज्य सरकार की नीति स्पष्ट है तो वो गूजरों को एसटी का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखे. सरकार जानबूझ कर देरी कर रही है ताकि गूजर-मीणा लड़ें." |
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