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तीसरे दौर की बातचीत विफल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान सरकार और गूजर समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की बातचीत भी विफल हो गई है. दोनों पक्षों के बीच दो चरणों की बातचीत विफल रहने के बाद इस बात की संभावना कम हो गई थी कि तीसरे चरण की बातचीत संभव हो सकेगी पर शुक्रवार की देर शाम दोनों ओर से बातचीत फिर शुरू हो गई. हालांकि इस तीसरे दौर की बातचीत के बाद भी किसी समझौते पर नहीं पहुँचा जा सका है. गूजर नेताओं का कहना है कि अब शनिवार को मुख्यमंत्री से आखिरी दौर की बातचीत हो सकती है. उधर राज्य की स्थितियाँ अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई हैं. जानकारों का कहना है कि स्थितियाँ संभाल पाने में राज्य सरकार जिस तरह से नाकाम रही है उससे मुख्यमंत्री की कुर्सी संकट में आ सकती हैं. राजस्थान की राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उनकी ओऱ से राज्य की शांति व्यवस्था पर एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई है. इस दौरान राज्य के खाद्य मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने राज्य के प्रभावित क्षेत्रों का हवाई मुआयना भी किया. पिछले चार दिनों से राजस्थान में गूजर समुदाय के लोगों का विरोध-प्रदर्शन जारी है. गूजरों की माँग है कि उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग से अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया जाए. मंगलवार को शुरु हुए इस विवाद के चलते अब तक कुल 23 लोगों को मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है. हिंसा जारी वहीं शुक्रवार को भी अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने माँग कर रहे गूजर समुदाय और इसका विरोध कर रहे मीणा समुदाय में जगह-जगह झड़पें होने की ख़बरें मिलीं. सबसे हिंसक संघर्ष दौसा ज़िले के लालसोट में हुआ जिसमें ग़ैरसरकारी सूत्रों के अनुसार नौ लोगों की मौत हुई. हालांकि पुलिस अधिकारी केवल पाँच लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान कम से कम 17 लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा दौसा, कसौली सहित कई ज़िलों में कई जगह दोनों समुदायों के बीच झड़पों की ख़बरें मिलीं. प्रशासन सवाईमाधोपुर, कसौली और भरतपुर में दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिए थे. 14 लोगों की मौत मंगलवार को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फ़ायरिंग से हुई थी. चार लोगों की मौत सवाईमाधोपुर में गुरुवार को हुई हिंसा के दौरान हुई थी. सरकार में मतभेद लेकिन राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार भी इस मुद्दे पर एकमत नज़र नहीं आ रही है. गूजर समुदाय और मीणा समुदाय के मंत्री अलग-अलग भाषा बोल रहे हैं.
राज्य के खाद्य मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा है कि मीणा समुदाय किसी भी सूरत में अनुसूचित जनजाति के दायरे में विस्तार स्वीकार नहीं करेगा. उनका कहना है, "इस मामले पर मीणा समुदाय के सभी विधायक एकमत हैं. हम मीणाओं को प्राप्त आरक्षण के साथ किसी तरह की छेड़खानी बर्दाश्त नहीं करेंगे." तो दूसरी ओर सरकार में गूजर समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कालूलाल गूजर का कहना है कि राज्य सरकार को इस माँग पर विचार करना चाहिए. अब तक अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल गूजरों का कहना है कि उन्हें इस वर्ग में रहकर आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा है और अब उन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाना चाहिए. तनाव मीणा समुदाय के प्रतिनिधियों की दौसा में लगातार बैठकें हो रही हैं और वो लामबंद हो रहे हैं. उन्होंने कहा है कि अगर राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बहाल नहीं हुआ तो वे ख़ुद कार्रवाई करेंगे. राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने स्वीकार किया है कि उन्होंने पिछले 50 वर्षों में राज्य में ऐसी हिंसा नहीं देखी. राज्य सरकार ने भरतपुर के हिंसाग्रस्त बयाना और सवाई माधोपुर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं. गूजर नेता विक्रम सिंह का कहना है कि राज्य सरकार की नीति स्पष्ट नहीं है और वो इस मामले को तूल दे रही है. उन्होंने कहा, "अगर राज्य सरकार की नीति स्पष्ट है तो वो गूजरों को एसटी का दर्जा देने के लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखे. सरकार जानबूझ कर देरी कर रही है ताकि गूजर-मीणा लड़ें." |
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