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'अफ़ग़ान नागरिक हिंसा से ज़्यादा पीड़ित' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक अध्ययन के मुताबिक अफ़ग़ानिस्तान में पिछले 15 महीनों में चरमपंथी हिंसा के सबसे ज़्यादा शिकार वहाँ के नागरिक हुए हैं. संस्था ह्यूमन राइट्स वाच के अध्ययन में कहा गया है कि हालांकि इनमें से ज़्यादातर हमले सेना और सरकार को निशाना बनाकर किए गए थे. लेकिन जो लोग इन हमलों के शिकार बने उनमें से अधिकतर का दोनों पक्षों से ही कोई संबंध नहीं था. पिछले दो सालों में अफ़गानिस्तान में तालेबान और सरकार विरोधी दूसरी ताकतों के हमलों में काफ़ी वृद्धि हुई है. रिपोर्ट के अनुसार इससे आम नागरिकों की मुश्किलें काफ़ी बढ़ी हैं. 'ह्यूमन राइट्स वाच' के अनुसार पिछले साल 136 आत्मघाती हमले हुए, जबकि उससे पहले साल में यह संख्या सिर्फ़ 25 थी. और हमलों की धमकी इनमें सेना को सबसे ज़्यादा बार निशाना बनाया गया, चाहे वह अमरीका के नेतृत्व वाली बहुराष्ट्रीय सेना हो या फिर अफ़ग़ान सेना और पुलिस हो. चूँकि ये हमले रिहायशी इलाक़ो में हुए इसलिए इनका असर भी सबसे ज़्यादा आम लोगों पर पड़ा. इन हमलों में 272 लोग मारे गए और 531 लोग घायल हुए. तालेबान ने इस साल और हमले करने की धमकी दी है. पिछले तीन दिनों में ही तीन जानलेवा हमले हो चुके हैं. आमतौर पर शांत रहने वाले उत्तरी इलाक़े के कुंदूज़ में सोमवार सुबह हुए हमले में क़रीब दस पुलिसकर्मी मारे गए. इससे पहले रविवार को दक्षिणी क्षेत्र के कंधार में चार निजी सुरक्षा कर्मियों को नार दिया गया था. जबकि शनिवार को पाकिस्तान सीमा के पास सात पुलिसवाले मारे गए थे. |
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