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सीबीआई की टीम जाएगी अर्जेंटीना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बोफ़ोर्स मामले के अभियुक्त इतालवी नागरिक ओत्तावियो क्वात्रोकी के प्रत्यार्पण की कोशिश करने के लिए सीबीआई की एक टीम अर्जेंटीना जा रही है. संभावना है कि यह टीम 28 फ़रवरी को रवाना होगी. उल्लेखनीय है कि ओत्तावियो क्वात्रोकी को इंटरपोल के वारंट पर छह फरवरी को अर्जेंटीना की पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. लेकिन भारत और अर्जेंटीना के बीच प्रत्यार्पण संधि न होने के कारण क्वात्रोकी को भारत लाना आसान नहीं होगा. हालांकि विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि इस मामले में जो भी नियम क़ानून हैं, उनके तहत क्वात्रोकी को भारत लाने की हर संभव कोशिश की जाएगी. दो सदस्यीय इस टीम के लिए कागज़ात तैयार किए जा रहे हैं और एक ओत्तावियो क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी. उधर लोकसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है यदि सीबीआई को क्वात्रोकी की गिरफ़्तारी का पता नहीं था तो सीबीआई प्रमुख को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सीबीआई टीम के दो सदस्यों को अर्जेंटीना भेजने की तैयारी की जा रही है. सीबीआई अधिकारियों के अनुसार इस टीम के लिए कागज़ात तैयार किए जा रहे हैं जो सोमवार या मंगलवार तक तैयार हो जाएँगे. प्रयास शनिवार को बरहामपुर में पत्रकारों से विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इस मामले में जो भी नियम क़ानून हैं, उनके तहत क्वात्रोकी को भारत लाने के प्रयास किए जाएँगे. भारतीय विदेश मंत्री का कहना था, “हमारा अर्जेंटीना के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, इसलिए हम वहाँ की सरकार के साथ इस पर बातचीत करेंगे.” उन्होंने कहा कि केंद्रीय जाँच एजेंसी क़ानूनी प्रावधानों के तहत अपनी ज़िम्मेदारी निभाएगी. सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह का कहना है कि अर्जेंटीना के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं होने के बावजूद क्वात्रोकी को भारत लाया जा सकता है. उन्होंने बीबीसी से कहा, “अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के मुताबिक हर देश इस तरह के मामले में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है. ऐसा अबू सलेम के मामले में भी हुआ जब पुर्तगाल के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं होने के बावजूद उन्हें वहाँ से भारत लाया गया.” सीबीआई की दिक्क़त बोफ़ोर्स मामले में ओत्तावियो क्वात्रोकी को लेकर सीबीआई के साथ सिर्फ़ एक यही दिक्क़त नहीं है कि अर्जेंटीना के साथ भारत की प्रत्यार्पण संधि नहीं है.
दरअसल सीबीआई पहले यह कह चुकी है कि क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ उसके पास कोई ठोस सबूत नहीं है. सीबीआई के इस बयान के बाद ही जनवरी 2006 में ब्रिटेन की एक अदालत ने क्वात्रोकी के दो खातों से सील हटाने के आदेश दिए थे. भारत सरकार के अनुरोध पर सील किए गए इन खातों में तीस लाख पाउंड और दस लाख पाउंड डॉलर थे. जिसे सील खुलने के बाद क्वात्रोकी ने निकलवा लिया था. समाचार एजेंसी यूएनआई के अनुसार सीबीआई के अधिकारी मानते हैं कि जब अर्जेंटीना में प्रत्यार्पण की कोशिश शुरु की जाएगी तो क्वात्रोकी इस बात को हथियार के रुप में इस्तेमाल कर सकते हैं कि भारतीय एजेंसी के पास उनके ख़िलाफ़ पक्के सबूत नहीं हैं. सीबीआई की एक दिक्क़त यह भी है कि वह इंटरपोल को दिया हुआ वारंट वापस नहीं ले सकता. एजेंसी का कहना है कि इसके लिए सीबीआई को यह लिखकर देना होगा कि क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला नहीं है. लेकिन सीबीआई अधिकारी कहते हैं कि भारत में क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी और बोफोर्स दलाली मामले का षडयंत्र रचने के मामले लंबित हैं. उल्लेखनीय है कि नियमानुसार क्वात्रोकी के प्रत्यार्पण की कार्रवाई पाँच मार्च से पहले शुरु करनी होगी. इसी दिन क्वात्रोकी को हिरासत को एक महीने पूरे होने वाले हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण की कोशिशें तेज़25 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस क्वात्रोकी पर वाम दलों का रुख़ कड़ा24 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस क्वात्रोकी अर्जेंटीना में हिरासत में लिए गए23 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस सीबीआई में 'हस्तक्षेप' पर हंगामा23 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस क्यों भरोसा नहीं होता सीबीआई पर?22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार-सीबीआई को यथास्थिति के निर्देश16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'क्वात्रोकी को कोई क्लीनचिट नहीं दी'15 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ सबूत नहीं: सरकार12 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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