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गुरुवार, 12 जनवरी, 2006 को 13:13 GMT तक के समाचार
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क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ सबूत नहीं: सरकार
क्वात्रोकी
सरकार का कहना है कि क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ सबूत नहीं मिले हैं
भारत सरकार ने कहा है कि सीबीआई के पास इटली के व्यापारी ओतावियो क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ बोफ़ोर्स मामले में कोई सबूत नहीं मिले हैं और इसकी जानकारी ब्रिटिश सरकार को दे दी गई है.

दूसरी ओर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें सरकार की कार्रवाई पर रोक लगाने की माँग की गई है. भाजपा ने भी सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ कड़ी आपत्ति जताई है.

क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ब्रिटिश सरकार और वहाँ की अदालत ने पिछले दो साल से क्वात्रोची के ख़िलाफ़ सबूत माँगे थे.

ब्रिटिश सरकार ने तीन साल पहले भारत सरकार के अनुरोध पर क्वात्रोची के ब्रिटेन के बैंक खातों पर रोक लगा दी थी.

भारद्वाज ने कहा,'' ब्रिटिश अदालत ने जाँच की स्थिति की जानकारी माँगी और हमने हाई कोर्ट की हाल के फ़ैसले की जानकारी दे दी जिसमें हिंदुजा भाइयों के ख़िलाफ़ मामले को खारिज कर दिया गया था.''

 ब्रिटिश अदालत ने जाँच की स्थिति की जानकारी माँगी और हमने हाई कोर्ट की हाल के फ़ैसले की जानकारी दे दी जिसमें हिंदुजा भाइयों के ख़िलाफ़ मामले को खारिज कर दिया गया था
हंसराज भारद्वाज, क़ानून मंत्री

जब उनसे पूछा गया कि सरकार इसके ख़िलाफ़ अपील करेगी तो उनका जवाब था,'' सीबीआई ने ब्रिटिश अदालत को माँगी गई जानकारी दे दी है और अब यह उन पर निर्भर है.''

हालांकि दूसरी ओर सीबीआई ने कहा कि बोफ़ोर्स हथियार सौदे में दलाली के मामले में क्वात्रोची को प्रत्यर्पित कर भारत लाने की कोशिशें जारी हैं.

सीबीआई प्रवक्ता का कहना था कि क्वात्रोची के ख़िलाफ़ इंटरपोल का रेड कार्नर वारंट है जिसका मतलब है कि वो वांछित लोगों में शामिल हैं.

लेकिन प्रवक्ता ने ब्रिटेन के खातों पर रोक हटाने के संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

मामला

लगभग 18 साल पहले यह बात सामने आई थी कि स्वीडन की हथियार कंपनी बोफ़ोर्स ने भारतीय सेना को तोपें सप्लाई करने का सौदा हथियाने के लिए 80 लाख़ डॉलर की दलाली चुकाई थी.

 क्वात्रोची के ख़िलाफ़ इंटरपोल का रेड कार्नर वारंट है जिसका मतलब है कि वो वांछित लोगों में शामिल हैं
सीबीआई प्रवक्ता

उस समय केंद्र में काँग्रेस की सरकार थी जिसके प्रधानमंत्री राजीव गाँधी थे. आरोप था कि राजीव गाँधी परिवार के नज़दीकी बताए जाने वाले इतालवी व्यापारी ओतावियो क्वात्रोकी ने इस मामले में बिचौलिए की भूमिका निभाई थी.

बोफ़ोर्स तोप सौदा राजीव गाँधी की हार का कारण भी बना. काफ़ी समय तक राजीव गाँधी का नाम भी इस मामले के अभियुक्त्तों की सूची में शामिल रहा. लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उनका नाम इस मामले की फ़ाइल से हटा दिया गया था.

आरोप है कि स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी बोफ़ोर्स ने भारत के साथ एक सौदे के लिए 1.42 करोड़ डॉलर की रिश्वत बाँटी थी और एक बिचौलिए के रूप में क्वात्रोकी को रिश्वत का एक बड़ा हिस्सा मिला था.

कुल 400 बोफ़ोर्स तोपों की ख़रीद का सौदा 1.3 अरब डॉलर का था. क्वात्रोची का कहना है कि वह भारत की घरेलू राजनीति के शिकार बने हैं.

क्वात्रोकी के अनुसार उनका दोष सिर्फ इतना है कि वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और उनकी पत्नी और काँग्रेस पार्टी की मौजूदा नेता सोनिया गाँधी के क़रीब रहे हैं.

एक इतालवी कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में क्वात्रोकी 1993 तक दिल्ली में रहे थे.

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