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क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण की कोशिशें तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुख़र्जी ने कहा है कि बोफ़ोर्स मामले में अभियुक्त इतालवी नागरिक ओत्तावियो क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण के लिए हर संभव कोशिश की जाएगी. उन्होंने शनिवार को बरहामपुर में पत्रकारों से कहा कि इस मामले में जो भी नियम क़ानून हैं, उनके तहत क्वात्रोकी को भारत लाने के प्रयास किए जाएँगे. भारतीय विदेश मंत्री का कहना था, “हमारा अर्जेंटीना के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है, इसलिए हम वहाँ की सरकार के साथ इस पर बातचीत करेंगे.” उन्होंने कहा कि केंद्रीय जाँच एजेंसी क़ानूनी प्रावधानों के तहत अपनी ज़िम्मेदारी निभाएगी. इस तरह की ख़बरें हैं कि सीबीआई की एक टीम क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण के लिए अर्जेंटीना जाने की तैयारी कर रही है. ग़ौरतलब है कि बोफ़ोर्स मामले में अभियुक्त क्वात्रोकी को इंटरपोल के वारंट पर छह फरवरी को अर्जेंटीना की पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. प्रत्यर्पण से जुड़ी मुश्किलें सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह का कहना है कि अर्जेंटीना के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं होने के बावजूद क्वात्रोकी को भारत लाया जा सकता है. उन्होंने बीबीसी से कहा, “अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के मुताबिक हर देश इस तरह के मामले में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है. ऐसा अबू सलेम के मामले में भी हुआ जब पुर्तगाल के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं होने के बावजूद उन्हें वहाँ से भारत लाया गया.” जोगिंदर सिंह का मानना है कि इस मामले में प्रत्यर्पण संधि होने या न होने से ज़्यादा ज़रुरी ये है कि सरकार या सीबीआई कितना प्रयास करती है. वो इस बात से भी सहमत नहीं है कि सीबीआई ने क्वात्रोकी के मामले में समय गंवाया है. उनका कहना है, “प्रत्यर्पण के लिए तैयारी करनी पड़ती है. रणनीति बनानी होती है. जहाँ तक गिरफ़्तारी के 30 दिनों के भीतर प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध करने की बात है तो वो अर्जेंटीना को पहुँच जाएगी.” हालाँकि जोगिंदर सिंह प्रत्यर्पण से जुड़ी पेचीदगियों को स्वीकार करते हैं. उनका कहना है, “प्रत्यर्पण के लिए ज़रुरी है कि क्वात्रोकी जिस मामले में भारत में अभियुक्त हैं, वो मामला अर्जेंटीना में भी अपराध हो. अगर ऐसा है तब हमें वहाँ के क़ानूनों से वाकिफ़ वकील की मदद लेनी होगी.” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत सरकार को ज़्यादा से ज़्यादा देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि करना चाहिए. इस बीच क्वात्रोकी के प्रत्यर्पण के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है. मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ साथ सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने इस मामले को दोबारा खोलने की माँग की है. | इससे जुड़ी ख़बरें क्वात्रोकी पर वाम दलों का रुख़ कड़ा24 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस क्वात्रोकी अर्जेंटीना में हिरासत में लिए गए23 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस सीबीआई में 'हस्तक्षेप' पर हंगामा23 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस क्यों भरोसा नहीं होता सीबीआई पर?22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार-सीबीआई को यथास्थिति के निर्देश16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'क्वात्रोकी को कोई क्लीनचिट नहीं दी'15 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ सबूत नहीं: सरकार12 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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