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कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक आज | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की मुलायम सरकार के भविष्य को लेकर असमंजस में पड़ी कांग्रेस ने रणनीति बनाने के लिए सोमवार को कार्यसमिति की बैठक बुलाई है. एक ओर केंद्र की यूपीए सरकार के प्रमुख सहयोगी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने साफ़ कह दिया है कि उत्तरप्रदेश का भविष्य सदन में ही तय होना चाहिए. वहीं कई और दल और कई वरिष्ठ नेता उत्तर प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ धारा 356 के प्रयोग के ख़िलाफ़ हैं. हालांकि करुणानिधि की पार्टी डीएमके और रामविलास पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी ने कांग्रेस का समर्थन किया है. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ़्ते बहुजन समाज पार्टी के उन 13 विधायकों को अयोग्य करार दिया था जिनके समर्थन पर 2003 में मुलायम सिंह सरकार का गठन हुआ था. कांग्रेस और भाजपा ने सरकार के गठन को अवैध ठहराते हुए कहा है कि मुलायम सिंह यादव सरकार को बर्खास्त कर देना चाहिए. मुलायम सिंह यादव ने ख़ुद इस्तीफ़ा देने से इनकार करते हुए कहा है कि वे 26 फ़रवरी को सदन में अपना बहुमत साबित कर देंगे. इससे पहले मुख्यमंत्री मुलायम सिंह 25 जनवरी को ही सदन में अपनी सरकार का बहुमत सिद्ध कर चुके हैं. चुनौती अब यूपीए का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस पर चुनौती है कि चुनाव के ठीक पहले वह अपनी कट्टर विरोधी समाजवादी पार्टी की सरकार को हटाने के लिए सीपीएम जैसे अपने सहयोगी दलों को किस तरह मनाती है.
हालांकि कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "सवाल सीपीएम को मनाने न मनाने का नहीं है, सवाल उनके विचारों को सामने रखकर फ़ैसला करने का है." उन्होंने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि मुलायम सरकार का गठन ही अवैध था. कपिल सिब्बल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि यदि मुलायम सिंह यादव बहुमत साबित करेंगे तो इसके लिए ज़ाहिर तौर पर विधायकों की ख़रीद-फ़रोख़्त करेंगे. उत्तर प्रदेश में धारा 356 लागू करने न करने पर रणनीति बनाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने सोमवार की शाम को कार्यसमिति की बैठक बुलाई है. बिहार और झारखंड के अनुभव के बाद कांग्रेस हर कदम सावधानी के साथ उठाना चाहती है. सीपीएम का विरोध उधर केंद्र सरकार के प्रमुख सहयोगी दल सीपीएम ने साफ़ कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार का भविष्य वहाँ के लोग तय करें न कि केंद्र सरकार या राजभवन. रविवार को पोलित ब्यूरो की बैठक की समाप्ति के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "उत्तर प्रदेश में हाल ही में चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्य की सरकार के भविष्य का फैसला वहाँ की जनता पर छोड़ा जाना चाहिए." उन्होंने कहा, "हम अनुच्छेद 356 लागू किए जाने के कतई पक्ष में नहीं है. उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार पर कोई भी फ़ैसला राजभवन या दिल्ली से नहीं लिया जाना चाहिए." उधर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी भी आक्रामक नज़र आ रही है. लोकसभा में समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि कई बार वे इस बात को सामने रख चुके हैं कि मौजूदा राज्यपाल को उत्तर प्रदेश भेजने के पीछे बस एक ही मंशा थी कि जितनी जल्दी हो सके, वो राज्य सरकार को गिरा सकें. उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार को बर्खास्त किया जाता है तो केंद्र सरकार भी चैन से नहीं बैठ पाएगी. कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस सारे सहयोगियों की मंशा को नज़रअंदाज़ करते हुए चलना चाहती है वो बहुत अलोकतांत्रिक तरीका है और देश के लिए घातक है. | इससे जुड़ी ख़बरें उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज़16 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस बसपा के 13 विधायकों की सदस्यता रद्द14 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मुलायम सरकार ने बहुमत साबित किया25 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी सरकार बर्ख़ास्त करने की माँग 22 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस राज्यपाल माने,18 को विधानमंडल का सत्र12 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मुलायम ने माना राज्यपाल का फ़ैसला11 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मुख्यमंत्री-राजभवन के बीच खींचतान10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'न्यायालय जाएगी समाजवादी पार्टी'31 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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