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उत्तर प्रदेश को लेकर उठापटक तेज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हो गई हैं. कांग्रेस नेताओं ने मुलायम सरकार को बर्ख़ास्त करने की मांग की है, तो भाजपा ने अपने दस विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की माँग रखी है. भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष के समक्ष माँग रखी है कि उसकी पार्टी के दस विधायकों की सदस्यता ख़त्म की जाए. भाजपा का कहना है कि इन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में पाला बदल कर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था. कांग्रेस के नेता सलमान ख़ुर्शीद ने पत्रकारों से कहा, "सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में आदेश के बाद ये सरकार अवैध रूप से चल रही है. मुलायम सरकार को ख़ुद ही चले जाना चाहिए, नहीं तो उसे बर्ख़ास्त किया जाना चाहिए." सलमान ख़ुर्शीद का कहना था कि जब पूर्व केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह के गुट ने मुलायम सरकार से समर्थन वापस लिया था, तब ही कांग्रेस ने राज्यपाल को लिखित में दे दिया था कि वह सरकार से समर्थन वापस ले रही है. दूसरी ओर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने स्पष्ट किया है कि वो त्यागपत्र नहीं देंगे. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी माकपा ने भी कहा है कि चुनी हुई राज्य सरकार को बर्ख़ास्त करना ठीक नहीं होगा. भाजपा का दाँव मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 26 फ़रवरी को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है और इसमें वे बहुमत साबित करने की कोशश करेंगे. केंद्र में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने शनिवार को पत्रकारों को बताया, "उत्तर प्रदेश विधानसभा के दस विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में पाला बदल कर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था, इसलिए पार्टी इनकी सदस्यता ख़त्म करने की सिफ़ारिश की गई है ताकि ये मुलायम सिंह यादव के विश्वास प्रस्ताव के दौरान मतदान न करने पाएँ." मुलायम सिंह यादव अभी उत्तराखंड में अपनी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं. इसी दौरान उन्होंने कहा कि उनके त्यागपत्र देने का कोई सवाल ही नहीं उठता है. उन्होंने दावा किया है कि उनकी सरकार अल्पमत में नहीं है और वो अपना बहुमत साबित कर देंगे. राज्यपाल की रिपोर्ट समाचार एजेंसियों के अनुसार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल टीवी राजेश्वर ने केंद्र सरकार को इस पूरे मामले पर एक रिपोर्ट भेजी है. ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों बहुजन समाज पार्टी के उन 13 विधायकों को अयोग्य करार दिया था जिनके समर्थन पर 2003 में मुलायम सिंह सरकार का गठन हुआ था. ये सभी विधायक बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा से अलग हुए थे और इन्होंने मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया था. उल्लेखनीय है कि मुलायम ने 25 जनवरी को ही सदन में अपनी सरकार का बहुमत सिद्ध किया था. केंद्र की यूपीए सरकार के मुख्य घटक दल कांग्रेस ने शुक्रवार को वामपंथी दलों के साथ राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना पर चर्चा की थी. हालाँकि सीपीएम के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने साफ़ किया था कि उनकी पार्टी बहुमत होने या न होने के आधार पर किसी भी सरकार को बर्ख़ास्त करने के पक्ष में नहीं रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज़16 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस बसपा के 13 विधायकों की सदस्यता रद्द14 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मुलायम सरकार ने बहुमत साबित किया25 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस यूपी सरकार बर्ख़ास्त करने की माँग 22 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस राज्यपाल माने,18 को विधानमंडल का सत्र12 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मुलायम ने माना राज्यपाल का फ़ैसला11 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस मुख्यमंत्री-राजभवन के बीच खींचतान10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'न्यायालय जाएगी समाजवादी पार्टी'31 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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