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सूचना क्रांति से बदल जाएगी ज़िदगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
माना जाता है कि आज का समाज सूचना का समाज है. प्रसिद्ध भविष्यविद् ऑलविन टॉफ़लर का मानना है कि सूचना समाज के रीति-रिवाजों को देखकर औद्योगिक समाज के लोग दंग रह जाएंगे. यह सूचना का समाज कैसे होगा ? कैसी सूचना क्रांति इस समाज को पैदा कर रही है ? यह सूचना क्रांति विश्व को किस प्रकार खगोलीकरण के रास्ते पर ले जा रही है ? और भारत में यह सूचना क्रांति किस तरह दबे पाँव आई और आज कैसा विशालकाय रूप अख़्तियार कर लिया है? सूचना तकनीक एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत दुनिया के अग्रणी देशों के साथ क़दम से क़दम मिलाकर आगे बढ़ रहा है. आज भारत में लगभग चार करोड़ लोग ऑनलाइन हैं और लगभग साढ़े छह करोड़ लोग किसी न किसी रूप में सर्च इंजन का इस्तेमाल करते हैं. हालाँकि भारत की विशालकाय आबादी का यह एक मामूली-सा भाग है लेकिन यदि दुनिया के अग्रणी देशों से तुलना की जाए तो कारोबार और संख्या के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी. विश्व में सूचना क्रांति का एक दूसरा बड़ा पैमाना 'टेलीडेनसिटी' यानी आबादी में टेलीफोन कनेक्शन का घनत्व है. यह छोटी बात नहीं है कि पिछले 15 वर्षों में हुए टेलीकॉम सुधार कार्यक्रमों के चलते आज भारत में लगभग 18 करोड़ टेलीफ़ोन सेट हैं. आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इनमें 76 प्रतिशत मोबाइल हैं. ऐसा समझा जाता है कि आने वाले समय को 'आइस' युग के नाम से जाना जाएगा. 'आइस' यानी इंफॉर्मेशन, कम्युनिकेशन और इंटरनेट. इस युग में इंटरनेट, मोबाइल और सैटेलाइट के गठजोड़ से एक नए समाज का जन्म होगा, जिसकी झलक अभी से दिखाई पड़ने लगी है. यदि एमआईटी मीडिया लैब के निकोलस नेग्रोपांट की 100 डॉलर में कंप्यूटर उपलब्ध कराने की योजना सफल होती है तो 'आइस' युग को रोक पाना कठिन होगा. बिना स्कूल गए शिक्षा ऐसा नहीं कि सूचना क्रांति का युग केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान का युग होगा. एक हद तक इसने औद्योगिक संस्थानों के कामकाज, ख़रीद-फ़रोख्त, माल भंडारण और माल डिलीवरी का तौर-तरीक़ा अभी से प्रभावित कर दिया है. उम्मीद की जाती है कि यह क्रांति पुरानी फैक्ट्री पद्धति को पूरे तौर पर बदल कर रख देगी. एक देश का काम दूसरे देश के मज़दूर अपनी सुविधा के किसी भी इलाक़े से करेंगे. घर पर रहने वाली महिलाएँ अब घर से ही ठेके पर काम कर सकेंगी. फैक्ट्री की पद्धति पर चलने वाली स्कूली शिक्षा पर भी सूचना क्रांति का व्यापक प्रभाव होगा और 'रिवर्स होम स्कूलिंग' का आगमन होगा. सूचना क्रांति का सामाजिक संबंधों पर भी अच्छा ख़ासा प्रभाव पड़ेगा और सोशल नेटवर्किंग के इस युग में पति-पत्नी और वो के संबंध फिर से परिभाषित होंगे. पिता-पुत्र संबंधों पर भी इसका व्यापक असर होगा और संभव है कि सदियों से पुरानी परिवार की परंपर पर भी गंभीर रूप से पुनर्विचार हो. सूचना तकनीक के क्षेत्र में अपनी दखल रखने वाला भारत सूचना क्रांति के इस प्रभाव से अछूता नहीं रहा पाएगा. मोबाइल, इंटरनेट, टेलीविज़न और पारंपरिक मीडिया का गठजोड़ अब देश में ठोस स्वरूप लेता दिख रहा है. पारंपरिक मीडिया कंपनियाँ अब मोबाइल हैंडसेट निर्माताओं और मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटरों के साथ मिलकर नई संभावनाओं को तलाश रही हैं. संभव है कि आने वाले दिनों में 30 मिनट के टेलीविज़न सोप ऑपेरा तीन मिनट के छोटे वीडियो क्लिप्स में मोबाइल सेट पर दिखें. राह में रोड़े साथ ही यह भी हक़ीकत है कि भारत को अभा सूचना क्रांति के क्षेत्र में सफलता के लिए लंबी दूरी तय करनी है.
जहाँ चीन मोबाइल के 4G तकनीक के लिए बैंडविड्थ उपलब्ध करा रहा है वहीं भारत में अभी 3G के लिए सहमति नहीं बन पाई है. कम शक्तिशाली सर्वर होने के चलते अभी अधिकतर भारतीय इंटरनेट साइट्स घरेलू ट्रैफिक के लिए विदेशी सर्वर का सहारा लेती हैं. सस्ते कंप्यूटर, ब्रोडबैंड कनेक्शन की अच्छी स्पीड और भारतीय भाषाओं में इंटरनेट पर सामग्री की कमी भारत में सूचना क्रांति की सफलता की राह में रोड़े हैं. उम्मीद है कि भारत जल्द ही अपने ढांचगत सुविधाओं में व्यापक सुधार कर इन रोड़ों को रास्ते से हटाएगा और एक नए सूचना समाज को जन्म देगा. | इससे जुड़ी ख़बरें साढ़े छह करोड़ नए फ़ोन ग्राहक15 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस डिजिटल टेलीविज़न की तेज़ रफ़्तार20 सितंबर, 2006 | पत्रिका लोकप्रिय साबित हो रहा है ग्रीन टीवी14 अप्रैल, 2006 | पत्रिका अब आ गया मोबाइल टीवी का दौर27 दिसंबर, 2005 | विज्ञान लॉग ऑन करिए और टीवी देखिए14 नवंबर, 2005 | कारोबार पुस्तकें इंटरनेट पर उपलब्ध होनी शुरु04 नवंबर, 2005 | विज्ञान समुद्र से छोड़ा जाएगा संचार उपग्रह04 नवंबर, 2005 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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