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साढ़े छह करोड़ नए फ़ोन ग्राहक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में टेलीफ़ोन का इस्तेमाल करने वालों की तादाद में तेज़ी से वृद्धि जारी है. इस रफ़्तार में ज़ाहिर है सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं मोबाइल फोन. भारत में टेलीकॉम क्षेत्र की नियामक संस्था टेलीकॉम रेग्यूलेटरी आथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने सोमवार को जो आंकड़े प्रस्तुत किए हैं उनसे पता चलता है कि देश में प्रति व्यक्ति टेलीफ़ोन उपलब्धता तेज़ी से बढ़ रही है. ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2006 में 6.5 करोड़ नए टेलीफोन उपभोक्ता बने हैं. पिछले महीने यानी दिसंबर 2006 देश में लगभग साढ़े 60 लाख नए उपभोक्ता जुड़े हैं. देश भर में कुल टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या (तार और बेतार मिलाकर) दिसंबर 2006 तक 18 करोड़ 90 लाख पहुँच गई है. जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा था परंपरागत लैंडलाइन फ़ोन के क्षेत्र में नकारात्मक विकास हुआ है यानी तार वाले फ़ोनों के कनेक्शनों में गिरावट आ रही है. सालाना बढ़ोतरी का तुलनात्मक अध्ययन करने पर ये पता चलता है कि वर्ष 2006 में, वर्ष 2005 के मुक़ाबले टेलीफोन कनेक्शन दोगुनी रफ़्तार से बढ़े हैं और वर्ष 2004 के मुकाबले में तो तीन-गुना. ट्राई के इन आंकड़ों में ग्रामीण और शहरी इलाक़ों में अलग-अलग स्थिति की जानकारी नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीफोन सुविधाओं के फैलाव की गति शहरों की तुलना में काफ़ी कम है. टेलीफ़ोन के साथ ही देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की तादाद भी बढ़ती जा रही है. ट्राई के मुताबिक दिसंबर 2006 में कुल ब्रॉडबैंड कनेक्शनों की संख्या 20 लाख 10 हज़ार हो गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें मोबाइल कंपनियाँ अड़ीं | भारत और पड़ोस जम्मू कश्मीर में मोबाइल फ़ोन | भारत और पड़ोस मोबाइल कंपनियाँ पटना हाईकोर्ट में तलब13 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस 'एसमएस से अफ़वाह फैलाने पर कार्रवाई'23 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस विदेशी इलेक्ट्रॉनिक कचरा बना मुसीबत19 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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