| मोबाइल कंपनियाँ पटना हाईकोर्ट में तलब | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार के पटना हाईकोर्ट ने अब मोबाइल कंपनियों को बुधवार को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं. बिहार के सभी जेलों में छापों के दौरान चार जेलों में मोबाइल मिलने के बाद ये आदेश दिए गए हैं. जेलों में बंद अपराधियों द्वारा जेल से ही मोबाइल फ़ोनों के ज़रिए अपराध करने की शिकायतों के बाद हाईकोर्ट ने पिछले बुधवार को राज्य की सभी जेलों में छापे मारने के आदेश दिए थे. हाईकोर्ट ने सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान मोबाइल कंपनियों को अदालत में तलब करते हुए कहा कि वे बुधवार को बताएं कि किसी भी व्यक्ति को मोबाइल देने की क्या प्रक्रिया है और क्या वे लोगों से उनकी पहचान के बारे में पूछताछ करते हैं. हाईकोर्ट ने पूछा है कि क्या कोई ऐसा तरीक़ा हो सकता है कि अपराधियों को मोबाइल देने से रोका जा सके. कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नागेंद्र राय और न्यायमूर्ति एसएन हुसैन के एक पीठ ने मोबाइल कंपनियों से पूछा है कि क्या वे कोई उपाय सुझा सकते हैं जिससे मोबाइल के ज़रिए होने वाले अपराध पर रोक लगाई जा सके. इससे पहले राज्य के अधिकारियों ने अदालत को पिछले बुधवार से 24 घंटों तक चले छापे के दौरान ज़ब्त सामग्री के विवरण दिए. उन्होंने बताया कि राज्य की चार जेलों से मोबाइल बरामद हुए हैं. इसके बाद अदालत ने अधिकारियों से कहा है कि वे ज़ब्त मोबाइलों से हुई बातचीत के विवरण मोबाइल कंपनियों से लेकर अदालत के सामने पेश करें. मामला पटना के एक सर्जन एनके अग्रवाल की हत्या के बाद बिहार के निजी और सरकारी डॉक्टर बढ़ते अपराधों के विरोध में हड़ताल की थी और इसी के बाद याचिका दायर की थी. इसके अलावा पिछले दिनों जेल में बंद जनप्रतिनिधियों की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. उदाहरण के तौर पर लोकजनशक्ति पार्टी के विधायक राजन तिवारी पर आरोप लगा कि दो इंजीनियरों के अपहरण के पीछे वही थे. मधेपुरा के राजद सांसद बेउर जेल में दरबार लगा रहे थे और इस पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के आदेश दिए थे. बिहार में कुछ 54 जेलें हैं जिनमें से छह सेंट्रल जेलें हैं. इन जेलों में 38 हज़ार कैदी हैं जबकि इनकी कुछ क्षमता 20 हज़ार से अधिक की नहीं है. |
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