BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मंगलवार, 30 जनवरी, 2007 को 16:59 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
230 साल की उम्र में ऑपरेशन

महावृक्ष के गिरने का ख़तरा पैदा हो गया था
हार्ट रॉट बीमारी से पीड़ित एशिया के सबसे ऊँचे वृक्ष की सर्जरी कर वैज्ञानिकों ने उसे नया जीवन दिया है.

भारतीय वन अनुसंधान संस्थान का दावा है कि देश में पहली बार किसी पेड़ का इस तरीके से उपचार किया गया है.

उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के टोंस वन प्रभाग में करीब 61 मीटर ऊँचा चीड़ का एक विशाल वृक्ष है. 230 साल पुराना ये वृक्ष भारतीय वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दस्तावेजों के मुताबिक़ एशिया का सबसे ऊँचा पेड़ है और केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने इसकी इसी विशेषता की वजह से इसे ‘महावृक्ष’ की संज्ञा से सुशोभित किया है.

दीर्घायु वृक्ष
 इस ऑपरेशन के बाद हम उम्मीद करते हैं कि ये पेड़ कम से कम 40-50 साल और जीवित रह सकेगा. अगर कोई प्राकृतिक विपदा न हुई तो
वन अधिकारी

पिछले कुछ समय से ये पेड़ हार्ट रॉट बीमारी की चपेट में आ गया था. इस बीमारी की वजह से पेड़ अंदर से खोखला होने लगता है और एक समय बाद नष्ट होकर गिर जाता है.

एफआरआई के फॉरेस्ट पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ एएन शुक्ला के मुताबिक, "लगातार रेजिन टैपिंग यानी रोगन निकालने और पेड़ के चारों ओर बनाए गए चबूतरे से इस पेड़ की ये दशा हो गई थी."

पर्यावरण की इस धरोहर को बचाना वैज्ञनिकों के लिए एक बड़ी चुनौती थी और उन्होंने इसके लिए उस तकनीक का सहारा लिया जो अब तक किताबों में सिर्फ एक अवधारणा के तौर पर ही सीमित थी.

साउंड इमेजिंग तकनीक से पता लगाया गया कि इस पेड़ का तना करीब 8 फीट अंदर तक खोखला हो गया था इसलिए सर्जरी ही एकमात्र उपचार था.

प्रक्रिया

सर्जरी की ये प्रक्रिया भी बड़ी दिलचस्प रही और लगभग वैसी ही थी जैसी किसी इंसान के जिस्म में की जाती है .

इस प्रक्रिया के तहत पहले वृक्ष के सभी मरी हुई कोशिकाएँ हटा दी गईं.

ख़ाली जगह पर चौबटिया लेप लगाया गया, चौबटिया लेप कॉपर कॉर्बोनेट, लीड ऑक्साइड और अलसी के तेल का मिश्रण है जो पेड़ों में फफूंद संक्रमण रोकने के काम आता है.

इसके बाद पेड़ के तने में करीब ढाई मीटर की ऊँचाई पर एक सुराख करके वहाँ से सीमेंट, सरिया और कंक्रीट की फिलिंग की गई.

डॉक्टर शुक्ला कहते हैं, "इस ऑपरेशन के बाद हम उम्मीद करते हैं कि ये पेड़ कम से कम 40-50 साल और जीवित रह सकेगा. अगर कोई प्राकृतिक विपदा न हुई तो."

टोंस वन प्रभाग के वन अधिकारी लक्ष्मण सिंह रावत ने बताया कि इस इलाके के स्थानीय लोग चीड़ के इस पेड़ को पवित्र मानते हैं और इसकी पूजा करते रहे हैं लिहाजा इसके संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों से वे भी बेहद खुश हैं.

इससे जुड़ी ख़बरें
तीन सौ पेड़ों का मुआवज़ा दो रुपये
28 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस
घरेलू कलह ने दी पेड़ पर शांति
27 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस
बोधि वृक्ष की टहनी 'काटने' का विवाद
21 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>