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शुक्रवार, 21 जुलाई, 2006 को 09:47 GMT तक के समाचार
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बोधि वृक्ष की टहनी 'काटने' का विवाद

गया में बोधि वृक्ष और मंदिर
बोधि मंदिर बौद्धों में बहुत पवित्र है
भारत के एक उत्तरी राज्य बिहार में कृषि वैज्ञानिकों ने उन ख़बरों की जाँच शुरू कर दी है कि गया में बोधि वृक्ष की एक टहनी काट दी गई हैं.

बोधि वृक्ष बौद्ध धर्म के अनुयायियों का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है.

ऐसी मान्यता है कि महात्मा बुद्ध ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व में इसी वृक्ष के नीचे निर्वाण प्राप्त किया था.

इसी पेड़ के पास महाबोधि मंदिर भी है और इस स्थल को चार साल पहले संयुक्त राष्ट्र ने विश्व विरासत का दर्जा दिया था.

बोधि वृक्ष की कुछ टहनियाँ काटे जाने की ख़बरें आने के बाद कृषि विशेषज्ञ एके सिंह के नेतृत्व में एक दल जाँच के लिए गया पहुँच गया है. गया बिहार की राजधानी पटना से 90 किलोमीटर दूर है.

जाँच दल जल्दी अपनी रिपोर्ट सौंप देगा.

जाँच दल यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि क्या बोधि वृक्ष की टहनी हाल ही में काटी गई है.

गया के ज़िला अधिकारियों ने बोध वृक्ष की टहनी काटे जाने की ख़बरों का पहले ही खंडन कर दिया है और उन्हें मात्र "निराधार अफ़वाह" बताया है.

गया के ज़िलाधिकारी जितेंद्र श्रीवास्तव ने हाल में कहा था कि बोधि वृक्ष पर कोई हमला नहीं हुआ है.

महाबोधि मंदिर के अधिकारियों का कहना है कि बोधि वृक्ष की एक टहनी तीन साल पहले उस समय काटनी पड़ी थी जब इस पेड़ को एक ख़तरनाक कीड़ा लग गया था.

मंदिर के अधिकारियों ने अपने दावे के समर्थन में इस पेड़ की वर्ष 2001 में उतारी गई कुछ तस्वीरें प्रकाशित की हैं.

महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति के एक सदस्य राम स्वरूप सिंह ने बीबीसी को बताया, "इस पवित्र वृक्ष को कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया गया है. यह सिर्फ़ एक अफ़वाह है."

राम स्वरूप सिंह ने कहा, "क़रीब पाँच साल पहले विशेषज्ञों ने पेड़ को कीड़े से बचाने के लिए एक टहनी काटी थी. बस इतनी सी बात है."

लेकिन मीडिया में इस तरह की ख़बरें आईं कि इस पवित्र वृक्ष की टहनी काटी गई है तो लोगों में ख़ासी नाराज़गी फैली.

दुनिया भर में रहने वाले बौद्ध इस स्थान को बहुत पवित्र मानते हैं.

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