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बामियान के पहाड़ों पर फिर दिखेंगे बुद्ध | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में बामियान में गौतम बुद्ध की विशाल मूर्तियों को तालेबान ने नष्ट कर दिया था लेकिन एक कलाकार लेज़र किरणों के ज़रिए उन्हें दोबारा लोगों के सामने पेश करने जा रहा है. लगभग 1600 वर्ष पुरानी धरोहर को तालेबान ने वर्ष 2001 में दुनिया भर में भारी विरोध के बावजूद तोप के गोलों से तोड़ डाला था. जिन पहाड़ों को काटकर गौतम बुद्ध की विशाल प्रतिमाएँ बनाई गई थीं, अब उन्हीं पहाड़ों पर लेज़र किरणों के जरिए बुद्ध की छवि दिखाई जाएगी. संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक मामलों की संस्था यूनेस्को ने बामियान में गौतम बुद्ध की मूर्ति को अंतरराष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था. अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने जापानी कलाकार हिरो यामागाता से संपर्क किया था और अब उनकी इस योजना को यूनेस्को की हरी झंडी मिलने की इंतज़ार है. योजना चौदह लेज़र उपकरणों की मदद से लगभग 52 मीटर ऊँची बिना चेहरे वाली छवियाँ हर रविवार को पहाड़ पर चार घंटे के लिए दिखाई जाएँगी. यूनेस्को को अब इस परियोजना के लिए अनुमति देनी है, यूनेस्को पहले इस बात की तसल्ली करना चाहता है कि लेज़र किरणों से ऐतिहासिक पहाड़ियों को नुक़सान तो नहीं पहुँचेगा. बामियान के गवर्नर का कहना था, "अगर पहाड़ों को नुक़सान पहुँचाए बग़ैर ऐसा करना संभव है तो हम इसकी हिमायत करेंगे क्योंकि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा." इस परियोजना पर लगभग 90 लाख डॉलर का ख़र्च आएगा और अगर अनुमति मिली तो इसे दो वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा. |
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