|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गौतम बुद्ध के मुखौटे की नेपाल वापसी
ऑस्ट्रिया की सरकार ने गौतम बुद्ध का एक मुखौटा नेपाल को लौटा दिया है. लगभग 400 वर्ष पुराने इस मुखौटे को नेपाल से चुराया गया था और यह ऑस्ट्रिया पहुँच गया था. ताँबे और काँसे से बना यह मुखौटा दो वर्ष पहले नेपाल के ललितपुर ज़िले के दफ़्तर से ग़ायब हो गया था. इस मुखौटे के साथ ग़ायब हुई तीन अन्य छोटी मूर्तियों का कुछ पता नहीं चल सका है. नेपाल में ऑस्ट्रिया के राजदूत ने एक औपचारिक समारोह में यह मुखौटा नेपाल सरकार को वापस किया. ऑस्ट्रियाई अधिकारियों का कहना है कि एक जर्मन नागरिक ने ऑस्ट्रिया के एक संग्रहालय में इस मुखौटे के बेचने की कोशिश की थी. इसके बाद संग्रहालय के अधिकारियों ने बौद्ध धर्म के विशेषज्ञों से इस मुखौटे के बारे में बातचीत की थी. छानबीन के बाद पता चला कि यह मुखौटा वही है जो दो वर्ष पहले ललितपुर से गायब हुआ था. इस मुखौटे की लंबाई एक मीटर है और इसे 'दीपांकर बुद्ध' कहा जाता है. इसका प्रयोग परंपरागत रूप से कई बौद्ध समारोहों में होता है. ऐसे मुखौटों को नेपाल के बौद्ध लोग बहुत श्रद्धा के साथ देखते हैं और उनकी काफ़ी हिफ़ाज़त रखी जाती है. लेकिन इसके बावजूद नेपाल से बेशक़ीमती बौद्ध कलाकृतियाँ अक्सर चोरी होती रहती हैं और उन्हें तस्कर पश्चिमी देशों में बेचते रहे हैं. नेपाल के पुरातत्व विभाग का कहना है कि वे इस तरह की चोरियों से वाकिफ़ हैं और उन्हें रोकने का प्रयास भी करते हैं. लेकिन वे यह बताने की हालत में नहीं हैं कि कितनी कलाकृतियाँ नेपाल से गायब हुई हैं, लेकिन इतना तो सबको पता है कि 'दीपांकर बुद्ध' की तरह कोई-कोई कलाकृति ही नेपाल वापस लौटती है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||