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महाबोधि मंदिर अब विश्व विरासत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में गया के प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर को संयुक्त राष्ट्र ने विश्व विरासत का दर्जा दिया है. दीपों की रोशनी में सैकड़ों भिक्षुओं के मंत्रोच्चार और नगाड़ों की गूंज के बीच यह कार्यक्रम संपन्न हुआ. केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन ने घोषणा की कि देश के सभी बौद्ध तीर्थों को बेहतरीन सड़कों के ज़रिए जोड़ा जाएगा और वहाँ बेहतरीन सुविधाएँ मुहैया कराई जाएँगी. महात्मा बुद्ध को गया में ही एक पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों का सबसे बड़ा तीर्थस्थल है. इस मौक़े पर गया में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया जिसमें दुनिया के अनेक देशों से आए प्रतिनिधि और धार्मिक नेता शामिल हुए. भारत के पर्यटन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र की इस घोषणा के बाद बोधगया पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन सकता है. बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा की कमी के कारण अब तक तीर्थयात्री गया जाने से डरते रहे हैं और वहाँ कई बार लूटपाट और बलात्कार की घटनाएँ हो चुकी हैं. विलंब संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक मामलों की संस्था यूनेस्को ने 2002 में ही महाबोधि मंदिर को विश्व विरासत घोषित कर दिया था लेकिन इसे यूनेस्को को सौंपने का औपचारिक कार्यक्रम अब जाकर हुआ है.
बताया जाता है कि महाबोधि मंदिर काफ़ी पुराना है और खुदाई में उसके अवशेष निकले थे, पुरातात्विक नज़रिए से भी यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मंदिर है. पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस नई मान्यता के बाद बोधगया को वही स्थान मिल सकेगा जो मुसलमानों के लिए मक्का का और ईसाइयों के लिए वैटिकन का है. बोधगया के प्रशासक ब्रजेश मेहरोत्रा का कहना है कि बिहार सरकार मंदिर की मरम्मत और बोधगया नगर में सुविधाएँ देने के लिए पहले ही लगभग 320 करोड़ रूपए ख़र्च कर चुकी है. उम्मीद की जा रही है कि यूनेस्को बोधगया की देखभाल के लिए आर्थिक सहायता देगा. राजनीति इस सम्मेलन में कंबोडिया, लाओस, जापान, कोरिया, चीन, ताइवान, थाइलैंड, सिंगापुर और मलेशिया जैसे 25 देशों के सैकड़ों प्रतिनिधि मौजूद थे. इनमें से ज़्यादातर लोग वही थे जो दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धर्म समागम में भाग लेने के लिए आए थे. ये अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन के साथ दिल्ली से एक विशेष विमान में बैठकर गया आए थे. जिस व्यक्ति की गैरमौजूदगी की सबसे ज़्यादा चर्चा हुई वह थीं बिहार की मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, जो आमंत्रित थीं लेकिन नहीं आईं. बोधगया से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के मुताबिक़, यह चर्चा चल रही है कि राबड़ी देवी केंद्र सरकार से इस बात पर नाराज़ हैं कि यह अंतरराष्ट्रीय बौद्ध समागम बोधगया की जगह दिल्ली में क्यों आयोजित किया गया. केंद्र सरकार ने "बिहार में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए" समागम दिल्ली में कराने का फ़ैसला किया था. |
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