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मंगलवार, 09 जनवरी, 2007 को 12:22 GMT तक के समाचार
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जो ख़बरें मिल रही हैं....
कंकाल ले जाते पुलिसकर्मी
कंकाल मिलने का सिलसिला रुका नहीं है अभी
दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी गाँव में बच्चों की हत्या के मामले में जो ख़बरें स्थानीय अख़बारों में छप रही है और जो ख़बरें विभिन्न स्रोतों से टेलीविज़न चैनल वाले दिखा रहे हैं वे ख़ून जमा देने वाले हैं.

यह एकबारगी कल्पना के बाहर की बात लगती है कि कोई व्यक्ति इतना अमानवीय कैसे हो सकता है.

अभी पुलिस यह ज़ाहिर नहीं कर रही है कि क्या क्या जानकारियाँ मिली हैं और सीबीआई से इस बात की उम्मीद कम ही है कि कुछ जानकारी अदालत में मामला आने के पहले पता चल सके.

उल्लेखनीय है कि निठारी के इस बंगले के पीछे से 17 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे. इनमें से कई उन बच्चों और महिलाओं के थे जो गाँव से पिछले दो बरसों में लापता हुए थे.

जो ख़बरें छनकर, स्रोतों के हवाले से मीडिया तक पहुँची हैं उसके अनुसार अभियुक्तों ने माना है कि बच्चों और महिलाओं की हत्याएँ उन्होंने कीं और हत्या से पहले उनका यौन शोषण किया.

और यदि मीडिया की ख़बरों पर भरोसा कर सकें तो अभियुक्तों ने बताया है कि यौन शोषण भी सामूहिक होता था.

जैसा कि घटना स्थल और शव के अवशेषों की जाँच करने वाले बता रहे हैं उसके अनुसार यह आशंका प्रबल होती है कि इन शवों को टुकड़ों में काटने का काम किसी विशेषज्ञ का है.

इस जानकारी के आधार पर यह भी जाँच का विषय हो गया है कि इन हत्याओं का संबंध कहीं मानव अंगों के व्यापार से तो नहीं है.

वेश्यावृत्ति के शौकीन बताए जाने वाले मोनिंदर सिंह पंधेर के बारे में कहा जा रहा है कि उनके संबंध 'बड़े' और 'पहुँच वाले' लोगों से थे और वे सब उनके उसी घर में पार्टी में शरीक होते थे जहाँ इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया.

सवाल

मोनिंदर और कोली हिरासत में

हालांकि छह पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है लेकिन मामले को नज़दीक से देख रहे संवाददाता मानते हैं कि कोशिश कई 'बड़े' लोगों को बचाने की ही है.

और फिर मामला राजनीतिक खींचतान का भी है.

जिस तरह से इस मामले को सीबीआई को सौंपने में देर हुई उसे भी कई लोग संदेह की नज़र से देखते हैं.

अब मामला सीबीआई के पास है और निठारी के उस बंगले के आसपास से कंकालों का मिलना रुका नहीं है.

मोनिंदर सिंह और सुरेंद्र कोली ने मिलकर कितने बच्चों और महिलाओं को मारा?, इन हत्याओं के पीछे असली मक़सद क्या था? और यह किस तरह से संभव हुआ कि दो साल तक इतने गंभीर अपराध को अभियुक्त छिपाए रख सके? और क्यों पुलिस शिकायतों को अनदेखा करती रही?

ऐसे ही अनगिनत सवाल हैं जिनके जवाब पता नहीं मिलेंगे भी या नहीं और मिलेंगे तो कब तक मिलेंगे.

और इससे बड़ा सवाल लोगों के मन में यह है कि क्या इस मामले के बाद समाज में कुछ बदलेगा.

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