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रविवार, 24 दिसंबर, 2006 को 15:40 GMT तक के समाचार
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कल्याण सिंह होंगे भावी मुख्यमंत्री

अटल बिहारी वाजपेयी और कल्याण सिंह
कल्याण सिंह एक बार बीजेपी से अलग भी हो चुके हैं
भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पार्टी के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अंत में एक विशाल रैली करके कल्याण सिंह को भावी मुख्यमंत्री के रुप में पेश किया है.

पार्टी ने ज़ोर-शोर से अपनी हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा पर वापस लौटने का ऐलान भी किया. रैली में बीजेपी का समूचा राष्ट्रीय नेतृत्व उपस्थित था.

राष्ट्रीय परिषद की बैठक में तीन दिनों तक रणनीति बनाने के बाद बीजेपी नेता पूरे जोश में थे.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी की खोई हुई साख को वापस लाने के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक मंच से ऐलान कर दिया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के हीरो रहे कल्याण सिंह अगले चुनाव में मुख्यमंत्री के उम्मीदवार होगें.

कल्याण सिंह ने वादा किया कि जनता ने मौक़ा दिया तो वे उत्तर प्रदेश को अपराधियों और आतंकवाद से मुक्त कर देंगे.

कल्याण सिंह ने कहा, "हम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अलख जगाकर प्रखर हिंदुत्व की आग पैदा करेंगे जो ज्वालामुखी का रूप ले लेगी. राममंदिर निर्माण हिंदू राष्ट्र का प्राणतत्व है और राममंदिर हिंदुत्व का प्राणतत्व है."

कल्याण सिंह ने मांग की कि उत्तर प्रदेश में विधान सभा के चुनाव निष्पक्ष रूप से कराने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाए. कल्याण सिंह ने लोगों को यह भी भरोसा दिलाया कि बीजेपी अपराधियों को चुनाव में टिकट नहीं देगी.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किसानों और आम-आदमी की समस्याओं को मुख्य मुद्दा बनाया. अपनी पुरानी भूमिका को दोहराते हुए वाजपेयी ने मुसलमानों को आश्वस्त करने की कोशिश की कि बीजेपी कोई धर्म के आधार पर राजनीति नहीं करती.

जोड़-तोड़

इस रैली का आयोजन पार्टी के चोटी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस की पूर्व संध्य पर किया गया था.

 हम सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अलख जगाकर प्रखर हिंदुत्व की आग पैदा करेंगे जो ज्वालामुखी का रूप ले लेगी. राममंदिर निर्माण हिंदू राष्ट्र का प्राणतत्व है और राममंदिर हिंदुत्व का प्राणतत्व है
कल्याण सिंह

जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण मतदाताओं में बहुजन समाज पार्टी के प्रति बढ़ते हुए रुझान को देखते हुए बीजेपी ने एक सोची समझी नीति के तहत वाजपेयी का महिमामंडन किया और साथ ही निचले तबकों को आश्वस्त करने के लिए कल्याण सिंह को भावी मुख्यमंत्री के रुप में पेश किया.

इससे पहले वाजपेयी और कल्याण सिंह में ज़बरदस्त टकराव हो चुका है और कल्याण सिंह ने अपनी अलग पार्टी बना ली थी. प्रेक्षकों का कहना है कि बीजेपी एक बार फिर से अपने नेतृत्व का पुराना सामाजिक समीकरण ठीक करने की कोशिश कर रही है.

इस रैली को सफल बनाने के लिए बीजेपी ने बड़ी तादात में बसों के अलावा पहली बार प्रदेश के विभिन्न अंचलों से स्पेशल ट्रेनें भी बुक की थी.

रैली में भारी भीड़ को देखते हुए बीजेपी नेता फूले नहीं समा रहे थे. रैली में न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि भारत भर से आए बीजेपी नेताओं ने हिस्सा लिया. बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी रैली में शामिल थे.

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