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विचार प्रक्रिया चलनी आवश्यकः वाजपेयी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा है कि विचारों की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए. उनके इस बयान को परोक्ष रूप से पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी का बचाव माना जा रहा है क्योंकि आडवाणी ने पिछले दिनों मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताया था जिसके बाद संघ परिवार में विरोध के स्वर उठने शुरू हुए. वाजपेयी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर एक समारोह में कहा,"विचारों की प्रक्रिया एक निरंतर चलनेवाली जीवन प्रवाह की धारा है और इसमें गहराई के लिए, विस्तार के लिए, नए विचारों के लिए, नए चिंतन के लिए बहुत स्थान है". वाजपेयी ने आगे कहा,"ये आवश्यक नहीं है कि उस सीमा को सभी स्वीकार करें. हम भी एक विचार पर निरंतर मनन कर रहे हैं, हम ये दावा नहीं करते कि हमने विचार की सीमा को पार कर लिया है, चिंतन की प्रक्रिया हमेशा चलती रहेगी". इस समारोह में पार्टी उपाध्यक्ष एम वेंकैया नायडू भी मौजूद थे और उन्होंने बिना आडवाणी-आरएसस विवाद का नाम लिए कहा कि हाल के दिनों से भाजपा की छवि को धक्का लगा है. राम मंदिर उधर रविवार को दीनदयाल जयंती पर भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ मंदिर की यात्रा की जहाँ से 15 वर्ष पहले उन्होंने अपनी रथ यात्रा शुरू की थी. आडवाणी ने वहाँ जाकर फिर राम मंदिर के निर्माण की बात दोहराई. उन्होंने कहा,"मेरी सोमनाथ यात्रा का अंत तभी होगा जब अयोध्या में एक भव्य राममंदिर बनेगा". लालकृष्ण आडवाणी पिछले 15 वर्षों से प्रतिवर्ष इस दिन सोमनाथ मंदिर जाते रहे हैं. आडवाणी ने कहा कि उनकी रथयात्रा के कारण भारतीय राजनीति में एक नए अध्याय का आरंभ हुआ. |
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