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शुक्रवार, 16 सितंबर, 2005 को 20:05 GMT तक के समाचार
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अनुशासनहीनता नहीं चलेगीः आडवाणी

आडवाणी और वाजपेयी
खुराना मामले पर दोनों वरिष्ठ नेताओं का मतभेद खुलकर सामने आ चुका है
चेन्नई में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने अध्यक्षीय भाषण में लालकृष्ण आडवाणी ने अनुशासनहीनता पर पार्टी के सदस्यों को कड़ी चेतावनी दी है.

भाजपा अध्यक्ष ने अपनी पाकिस्तान यात्रा पर भी सफ़ाई दी और संघ को भी संदेश दिया कि भाजपा से रिश्ते रखने से उसे भी फ़ायदा हुआ है.
उन्होंने राष्ट्रीय हित के मामलों में ग़लत नीतियाँ अपनाने का आरोप लगाते हुए यूपीए गठबंधन सरकार की आलोचना की.
आडवाणी ने मनमोहन सिंह को देश का सबसे कमज़ोर प्रधानमंत्री क़रार दिया.

चेतावनी

आडवाणी ने पार्टी में अपने विरोधियों को सीधे चेतावनी देते हुए कहा है कि विरोधी विचार को अनुशासनहीनता की हद तक ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि बहस और चर्चा किसी भी लोकतांत्रिक संगठन की जीवंतता के संकेत होते हैं. किन्ही मुद्दों पर विभिन्न मत हो सकते हैं और उनपर उचित मंच पर बहस करना उचित है. लेकिन इसको अनुशासनहीनता की हद तक नहीं ले जाने दिया जाएगा.

ग़ौरतलब है कि कार्यकारिणी की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुँचते ही पार्टी के एक पूर्व अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण ने आडवाणी पर निशाना साधा था. उनका कहना था कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी हो रही है और ऐसे लोगों को कोई ज़िम्मेदारी दी जानी चाहिए.

बंगारू के अलावा भाजपा के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष जना कृष्णमूर्ति और प्यारेलाल खंडेलवाल जैसे नेता पहले ही आडवाणी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा चुके हैं.

मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा नेता भी आडवाणी के विरुद्ध मुखर रहे हैं.

मुरली मनोहर जोशी तो राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय होते हुए चेन्नई पहुँचे. वहाँ उन्होंने संघ के नेताओं से मुलाक़ात की.

माना जा रहा है कि इससे वो ये संदेश देना चाहते थे कि आडवाणी विरोध को संघ का आशीर्वाद हासिल है.

पाकिस्तान पर सफ़ाई

आडवाणी ने अपनी पाकिस्तान यात्रा पर लंबी सफ़ाई दी है और उस यात्रा का बचाव किया है.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताने से ही भाजपा में सारे विवाद की शुरुआत हुई थी और आडवाणी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. हालाँकि उन्होंने बाद में इस्तीफ़ा वापस ले लिया था.

आडवाणी ने कहा है कि उन्होंने पाकिस्तान यात्रा के दौरान पाया कि वहाँ राजनीतिज्ञों के एक वर्ग में नीतियों में बदलाव की धारणा पनपने लगी है. आडवाणी ने कहा कि कटासराज मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए उठाए गए क़दमों को शब्दों में व्यक्त नही किया जा सकता.

आडवाणी का कहना था कि यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम है क्योंकि यह पाकिस्तान द्वारा अपने इस्लाम पूर्व इतिहास को मान्यता देना जैसा है.

उनका कहना था, “हमें पाकिस्तान के साथ मित्रता को बढ़ावा देने के लिए या वहाँ पनप रही सहिष्णुता की हल्की झलक का स्वागत करने में हिचक नहीं होनी चाहिए.”

संघ को फ़ायदा

हाल में आडवाणी के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से रिश्ते तल्ख़ हो गए हैं. यहाँ तक कि संघ जिन्ना के संबंध में पाक में दिए बयान के कारण उनसे इस्तीफ़े की माँग कर चुका है.

आडवाणी ने संघ नेताओं को अपने भाषण में स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा के रिश्तों के कारण उसे भी लाभ हुआ है.

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा और संघ में सदैव एक गहरा रिश्ता रहा है और इन संबंधों से दोनों संगठनों को लाभ हुआ है.

प्रेक्षकों का मानना है कि आडवाणी के इस भाषण में वैचारिक रूप से कोई संदेश नहीं है और इसमें यूपीए सरकार को निशाना बनाया गया है जबकि कार्यकारिणी जैसे मंच पर पार्टी कॉडर का मार्गदर्शन किया जाता है.

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