|
खुराना ने आडवाणी में भरोसा जताया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भाजपा से निष्कासित मदनलाल खुराना ने शनिवार को एक बार फिर अटलबिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात की. लेकिन इस बार खुराना कुछ बदले हुए से नज़र आए. उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में काम करने पर कोई आपत्ति नहीं है और न ही उन्होंने कभी आडवाणी पर शंका प्रकट की है. खुराना का कहना था,'' पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी हमेशा से मेरे मार्गदर्शक रहे हैं. मुझे पार्टी के नए नेताओं से शिकायत है.'' खुराना ने उदाहरण दिया कि वरिष्ठ नेता जैसे जम्मू कश्मीर के चमनलाल गुप्ता और हिमाचल प्रदेश के शांता कुमार का नए नेता सम्मान नहीं कर रहे हैं. मदनलाल खुराना को सात सितंबर को पार्टी को आडवाणी के नेतृत्व पर सवाल उठाने के लिए निष्कासित कर दिया था. उस दौरान उन्होंने कहा था कि वो आडवाणी के नेतृत्व में काम नहीं कर सकते हैं. सुलझाने की कोशिश इस मामले में शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की फ़ोन पर बात हुई थी. साथ ही संकट को सुलझाने के लिए मेल-मुलाक़ातों का दौर शुरु हो गया है. शुक्रवार सुबह वैंकया नायडू और जसवंत सिंह की लालकृष्ण आडवाणी के घर बैठक हुई और उसके बाद दोनों नेताओं की अटलबिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात हुई. मदनलाल खुराना ने शुक्रवार को भी अटलबिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात की. इसके बाद खुराना ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने वाजपेयी से कहा कि वो लालकृष्ण आडवाणी और उन्हें बुला लें और जो गिले-शिकवे हैं, वे आमने-सामने बैठकर दूर कर लेंगे. कुछ दिन पहले ही पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने मदनलाल खुराना के निष्कासन को हरी झंडी दी थी. उसके बाद वाजपेयी ने पार्टी अध्यक्ष के इस फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण क़रार दे दिया था. इसके बाद यह मामला गंभीर हो गया था और आडवाणी बनाम वाजपेयी बन गया था. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||