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खुराना को निष्कासित करने की सिफ़ारिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी की अनुशासनिक समिति ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना को पार्टी से निकाल दिए जाने की सिफ़ारिश की है. समाचार एजेंसियों के अनुसार अनुशासनिक समिति के अध्यक्ष राम नाईक ने पत्रकारों को बताया, "सर्वसम्मति से फ़ैसला लिया गया कि पार्टी अध्यक्ष को इस बारे में लिखा जाए. हमने मदनलाल खुराना को अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिए जाने की सिफ़ारिश की है." उनका कहना था कि इस बारे में पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी से फ़ोन पर बात हो गई है. अनुशासनिक समिति के अनुसार खुराना ने पंद्रह दिन पहले उन्हें जारी किए गए 'कारण बताओं नोटिस' का जवाब नहीं दिया. नायक का कहना था कि खुराना ने केवल इतना जवाब दिया था कि उन्हें नोटिस मिल गया है और उन्होंने जवाब देने के लिए और समय दिया जाए. खुराना ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि वे लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में काम नहीं कर सकते. उन्होंने पार्टी अध्यक्ष आडवाणी से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाए जाने की माँग भी की थी जिसके बाद पार्टी से उन्हें निलंबित कर दिया गया था. 'अलोकतांत्रिक कदम' पर्यवेक्षक इस फ़ैसले को पार्टी में असंतुष्ट नेताओं को दिए गए संदेश के रूप में देख रहे हैं. फ़ैसले करते वक्त अनुशासनिक समिति की दो घंटे की बैठक हुई. नायक का कहना था कि पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी से बात करने के बाद ही अनुशासनिक समिति का फ़ैसला सार्वजनिक किया गया. उधर मदनलाल खुराना का कहना था, "मुझे जब कारण बताओ नोटिस मिला तो मुझे बहुत धक्का लगा. मैने कुछ समय माँगा था लेकिन मुझे समय नहीं दिया गया. " उनका कहना था, "ये अलोकतांत्रिक है... कुछ कहने के लिए समय भी न दिया जाना और पार्टी से छह साल के लिए निकाला जाना. लोकतंत्र ऐसे नहीं चलता." राम नायक का कहना था कि इस मामले में अब अंतिम फ़ैसला पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के हाथ में है. |
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