| मदनलाल खुराना ने इस्तीफ़ा दिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मदनलाल खुराना ने राजस्थान के राज्यपाल के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने अपने त्यागपत्र की घोषणा दिल्ली में की. दिल्ली के मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रह चुके मदन लाल खुराना पिछले तीन दिनों से दिल्ली में ही थे और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी और भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी से मुलाक़ात की थी. खुराना ने अपना इस्तीफ़ा राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को सौंप दिया है. राष्ट्रपति ने उन्हें अगली व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने को कहा है. नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में खुराना ने अपने फ़ैसले की घोषणा की. खुराना ने कहा, "मैंने राष्ट्रपति से अपना त्यागपत्र मंज़ूर करने को कहा है. मैं अब सक्रिय राजनीति में लौटना चाहता हूँ और दिल्ली के विकास के लिए काम करना चाहता हूँ." समझा जा रहा है कि वे पार्टी संगठन में लौटेंगे और उन्हें पार्टी उपाध्यक्ष जैसा कोई महत्वपूर्ण पद दिया जा सकता है. कारण नवंबर के अंत में कई राज्यों के राज्यपालों का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है. इसी के मद्दे नज़र केंद्र सरकार नए राज्यपालों की तलाश में जुट गई है. अटकलें लगाई जा रही हैं कि कुछ राज्यपालों को दूसरी जगह भी भेजा जा सकता है. जुलाई में जब केंद्र सरकार ने चार राज्यों के राज्यपालों को हटा दिया था तब राजस्थान के राज्यपाल खुराना का पद सुरक्षित बच गया था. उस समय उत्तर प्रदेश के विष्णुकांत शास्त्री, गुजरात के कैलाशपति मिश्रा, हरियाणा के बाबू परमानंद और गोवा के राज्यपाल केदारनाथ साहनी को बर्खास्त किया गया था. दिसंबर 2003 में दिल्ली विधानसभा में भाजपा की हार के बाद उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और केंद्र की तत्कालीन सरकार ने उन्हें राज्यपाल बना दिया था. |
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