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चार राज्यों में राज्यपाल नियुक्त हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के उन चार राज्यों में नए राज्यपालों को नियुक्त कर दिया गया है जहाँ के राज्यपालों को हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. नवल किशोर शर्मा को गुजरात, ए आर किदवई को हरियाणा, टी वी राजेश्वर राव को उत्तर प्रदेश और एस सी जमीर को गोवा का राज्यपाल बना दिया गया है. सोमवार को राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी की गई एक विज्ञप्ति में इन राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की गई. नवल किशोर शर्मा काँग्रेस के पुराने दिग्गज हैं और वे पार्टी के महासचिव रह चुके हैं. ए आर किदवई संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहने के अलावा बिहार के राज्यपाल भी रह चुके हैं. टी वी राजेश्वर राव सरकारी ख़ुफ़िया विभाग(आइबी) के प्रमुख रह चुके हैं. एस सी जमीर नागालैंड के मुख्यमंत्री थे. चुनौती इस बीच भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद ने राज्यपालों को हटाने के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. राज्यसभा में भाजपा सांसद बी पी सिंघल ने इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है. उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार राज्यपालों को पाँच साल के निश्चित कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाता है और इसलिए ये क़दम असंवैधानिक है. बी पी सिंघल विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल के भाई हैं. विरोध उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और गोवा के राज्यपालों को दो जुलाई को बर्ख़ास्त कर दिया गया था. ये राज्यपाल थे विष्णुकांत शास्त्री, कैलाशपति मिश्र, बाबू प्रेमानंद और केदारनाथ साहनी. आम धारणा ये रही कि चूँकि ये राज्यपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे इसलिए केंद्र में एनडीए सरकार का तख़्त छिनने के बाद राज्यपालों की भी छुट्टी हो गई. मनमोहन सिंह सरकार ने कहा भी कि केंद्र ने आगे मुश्किल ना हो, इस कारण इन राज्यपालों को हटाया गया. मगर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस क़दम को लोकतंत्र विरोधी बताया और कहा कि इसका विरोध किया जाएगा. |
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