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भारत में चार राज्यपाल बर्ख़ास्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में चार राज्यों के राज्यपालों को बर्ख़ास्त कर दिया गया है. ये हैं-उत्तर प्रदेश के विष्णुकांत शास्त्री, गुजरात के कैलाशपति मिश्रा, हरियाणा के बाबू परमानंद और गोवा के राज्यपाल केदारनाथ साहनी. राष्ट्रपति भवन से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार इन चारों राज्यपालों से कहा गया है कि वे अपना पद तुरंत छोड़ दें. विश्लेषकों का कहना है कि ये चारों व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय सेवक संघ के क़रीबी माने जाते थे और उन्हें पिछली एनडीए सरकार ने नियुक्त किया था. इससे पहले भी उनसे इस्तीफ़ा देने को कहा गया था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था. भाजपा प्रवक्ता अरुण जेटली ने इस क़दम को 'राजनीति से प्रेरित और असांविधानिक' बताया. उधर, कॉंग्रेस पार्टी ने भाजपा पर इस मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया. पार्टी प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि राज्यपालों की नियुक्ति हमेशा से सरकार का विशेषाधिकार रहा है. हालाँकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कोई अनहोनी बात नही है. पहले भी सरकारें अपने हिसाब से राज्यपालों की नियुक्ति और बर्ख़ास्तगी की सिफ़ारिशें करती आई हैं. राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में कहा गया है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल मोहम्मद फ़ज़ल गोवा की और मध्य प्रदेश के राज्यपाल बलराम जाखड़ गुजरात की अतिरिक्त ज़िम्मेदारी संभालेंगे. इनके अलावा पंजाब के राज्यपाल ओपी वर्मा को हरियाणा और उत्तरांचल के राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का कार्यभार सौंपा गया है. |
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