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राज्यपाल हटाने के फ़ैसले का बचाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि चार राज्यों के राज्यपालों को बिल्कुल सोच-समझकर हटाया गया है. उन्होंने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चारों राज्यपालों को किसी विशेष विचारधारा के कारण नहीं बल्कि दूसरी वजह से हटाया गया. उन्होंने कहा,"हम ये नहीं कह रहे कि वे किसी विशेष विचारधारा से जुड़े थे बल्कि हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि हमें ऐसा लगा कि शायद ये लोग केंद्र के साथ ताल-मेल नहीं बिठा पाएँ". शिवराज पाटिल ने कहा कि इस फ़ैसले के पहले इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सूचित कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि वे इस बारे में अलग से कोई स्पष्टीकरण नहीं देना चाहते और इसे लेकर विरोध करना सही नहीं है. पाटिल ने कहा,"मैं किसी के ख़िलाफ़ नहीं बोलना चाहता मगर ये हमारा निर्णय है और हमें लगा कि आगे कोई दिक़क़्त न आए इसलिए हमने ये फ़ैसला किया". विरोध शुक्रवार को चार राज्यों- उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और गोवा- के राज्यपालों को बर्ख़ास्त कर दिया गया था. प्रमुख विपक्षी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के इस फ़ैसले की तीख़ी आलोचना की थी. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे लोकतंत्र विरोधी क़दम बताते हुए गृहमंत्री शिवराज पाटिल से माँग की थी कि या तो वे इस बात से इनकार करें कि चारों राज्यपालों को उनके राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि के कारण हटाया गया या फिर संघ से माफ़ी माँगें. ऐसी संभावना है कि सोमवार से आरंभ होनेवाले संसद के सत्र में विपक्षी दल राज्यपालों की बर्ख़ास्तगी को मुद्दा बनाने की कोशिश करेंगे. |
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