|
राज्यपालों के मामले में केंद्र को नोटिस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चार भारतीय राज्यों के राज्यपालों को हटाने के मामले को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. यह जनहित याचिका भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बीपी सिंघल ने दायर की थी. बुधवार को मुख्य न्यायाधीश आरसी लोहाटी की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पीठ ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया. गत दो जुलाई को केंद्र की यूपीए सरकार ने उत्तरप्रदेश के राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री, हरियाणा के राज्यपाल बाबू परमानंद, गुजरात के राज्यपाल कैलाशपति मिश्रा और गोवा के राज्यपाल केदारनाथ साहनी को बर्खास्त कर दिया था. केंद्र का तर्क था कि चूँकि ये राज्यपाल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य रहे हैं इसलिए इनके पद पर बने रहने से राज्यपाल पद की गरिमा पर विपरीत असर होता है. याचिकाकर्ता बीपी सिंघल ने अपनी याचिका में कहा था कि राज्यपालों को उनके कार्यकाल से पहले हटाना असंवैधानिक है. हालांकि सोमवार को इस मुद्दे पर लोकसभा में हुई चर्चा के दौरान गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा था कि राज्यपालों को कार्यकाल समाप्त होने से पहले हटाना केंद्र सरकार के संवैधानिक और क़ानूनी अधिकारों में आता है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||