| खुराना के बचाव में आए वाजपेयी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मदनलाल खुराना के बचाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी खुलकर सामने आ गए हैं. वाजपेयी ने मदनलाल खुराना के पार्टी से निष्कासन को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है. अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि 'खुराना ने पार्टी की 40 साल निस्वार्थ भाव से सेवा की है और पार्टी के संदेश को दूर दूर तक पहुँचाने का प्रयत्न किया है.' वाजपेयी ने कहा है कि 'खुराना पर पार्टी विरोधी कार्य करने का आरोप लगाया गया है लेकिन अच्छा होता कि खुराना के ख़िलाफ़ कार्रवाई के बजाए उन्हें अपनी सफ़ाई पेश करने का एक और मौक़ा दिया जाता.' हाल में जब मदनलाल खुराना अटल बिहारी वाजपेयी से मिले थे तब वाजपेयी ने कहा था कि पार्टी खुराना की सेवाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें काम करने का एक और मौक़ा देगी. ग़ौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी की अनुशासन समिति ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना को पार्टी से निकाल दिए जाने की सिफ़ारिश की थी. प्रेक्षकों का मानना है कि वाजपेयी के खुलकर खुराना प्रकरण में कूद पड़ने से पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के सामने मुश्किलें पैदा हो गई हैं और अब यह मामला और उलझ गया है. निष्कासन अनुशासन समिति के अध्यक्ष राम नाईक ने पत्रकारों को बताया था, "सर्वसम्मति से फ़ैसला लिया गया कि पार्टी अध्यक्ष को इस बारे में लिखा जाए. हमने मदनलाल खुराना को अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिए जाने की सिफ़ारिश की है." इसके बाद पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने मदनलाल खुराना को पार्टी से निकाल दिया था. उधर मदनलाल खुराना का कहना था, "मुझे जब कारण बताओ नोटिस मिला तो मुझे बहुत धक्का लगा. मैने कुछ समय माँगा था लेकिन मुझे समय नहीं दिया गया. " उनका कहना था, "ये अलोकतांत्रिक है... कुछ कहने के लिए समय भी न दिया जाना और पार्टी से छह साल के लिए निकाला जाना. लोकतंत्र ऐसे नहीं चलता." मदनलाल खुराना ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में आडवाणी को आड़े हाथों लिया और कहा कि उनका रवैया 'तानाशाहीपूर्ण' है. उन्होंने घोषणा की कि वो अगले कुछ दिनों में अपने अगले क़दम की घोषणा करेंगे. |
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