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तमिल विद्रोही हथियार छोड़ें: विक्रमनायके | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के प्रधानमंत्री रत्नासिरी विक्रमनायके ने तमिल विद्रोहियों से अपील की है कि वे अपने हथियार त्याग दें और शांति स्थापित करने के लिए बातचीत करें. प्रधानमंत्री का यह बयान तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के प्रमुख प्रभाकरण के भाषण के एक दिन बाद आया है. ग़ौरतलब है कि सोमवार को प्रभाकरण ने कहा था कि उनके पास अलग तमिल राष्ट्र के लिए प्रयास करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. अपने वार्षिक नीतिगत भाषण में प्रभाकरण ने आरोप लगाया था कि चार साल पहले सरकार के साथ जिस संघर्षविराम पर सहमति हुई थी, उसे इस सरकार ने नाकाम कर दिया है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया था कि सरकार तमिल लोगों के ख़िलाफ़ सैनिक और आर्थिक युद्ध चला रही है. प्रभाकरण ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे एलटीटीई के 'स्वतंत्रता संघर्ष' को मान्यता दें. रत्नासिरी विक्रमनायके ने ज़ोर देकर कहा है कि एलटीटीई को देश में 'आतंकवाद' बंद करना चाहिए. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि सुरक्षाकर्मी 'आतंकवादी' नहीं हैं. रत्नासिरी विक्रमनायके का कहना था कि लक्ष्य सत्ता के दो केंद्र बनाने का था जिसमें हर पक्ष की भागीदारी हो. | इससे जुड़ी ख़बरें "तमिल राष्ट्र के अलावा विकल्प नहीं"27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत के अहम दौरे पर पहुँचे राजपक्षे25 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका में ताज़ा संघर्ष, 20 की मौत24 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'विद्रोहियों के इलाक़े पर बमबारी'21 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नौसेना और विद्रोहियों के बीच संघर्ष18 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाल सैनिकों की भर्ती का आरोप13 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस श्रीलंका की स्थिति पर चिंतित हैं अन्नान11 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई समर्थक सांसद की हत्या10 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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